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लैंसडौन समेत देशभर के 62 कैंट बोर्ड को मिल सकता है निकाय का दर्जा, 5 को बैठक में होगा फैसला

Fri, 04 Jan 2019 09:02 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लैंसडौन
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लैंसडौन Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 04 Jan 2019 09:02 AM IST
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India all 62 Cantonment board may become nikay soon 
लैंसडौन बोर्ड

लैंसडौन समेत देश की 62 छावनी परिषदों (कैंट बोर्ड) को खत्म कर उन्हें नगर पंचायत या नगर पालिका परिषद का दर्जा मिल सकता है। देशभर की छावनी परिषदों में रहने वाले नागरिकों की मांग पर विचार के लिए बनी सात सदस्यीय कमेटी की आगामी पांच जनवरी को रक्षा मंत्रालय के साथ बैठक में इस मसले पर विचार किया जाएगा।

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लैंसडौन के विधायक दिलीप रावत ने बताया कि मोदी सरकार कैंट बोर्ड व्यवस्था को खत्म कर उन्हें निकाय में तब्दील करने जा रही है। आगामी पांच जनवरी को रक्षा मंत्रालय द्वारा आहूत बैठक में छावनियों के भविष्य पर फैसला होना है।  
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इस प्रस्ताव से लैंसडौंन छावनी परिषद क्षेत्र में निवास करने वाली जनता को अधिक सहूलियत मिल सकेगी। विधायक प्रतिनिधि वरिष्ठ भाजपा नेता सूर्यदेव शाह का कहना है कि सात सदस्यीय कमेटी के साथ रक्षा मंत्रालय की पांच जनवरी को दिल्ली में होने वाली अहम बैठक पर सभी की नजरें हैं।

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इस बैठक में छावनी अधिनियमों में संशोधनों के अलावा छावनियां खत्म करने के बारे में रक्षा मंत्री, रक्षा राज्य मंत्री, छावनियों के सांसद, सात सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी के सदस्य हिस्सा लेंगे। कांग्रेस कार्यकर्ता हितेश शर्मा का कहना है कि मोदी सरकार का यह फैसला छावनियों के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। छावनी अधिनियम के कारण क्षेत्र में जनता से जुड़े कई विकास कार्य नहीं हो पाते।

लैंसडौन कैंट बोर्ड के उपाध्यक्ष दिनेश रावत का कहना है कि नगर का विकास छावनी अधिनियम के जटिल कानूनों में कैद होकर रह गया है। उन्होंने कहा कि छावनी अधिनियम को सरल बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

छावनी परिषद के सदस्य डा. एसपी नैथानी ने कहा कि छावनी अधिनियमों में वर्ष 1983 और वर्ष 2006 में दो बार संशोधन हुए। इन संशोधनों के माध्यम से निर्वाचित सदस्यों को पंगु बना दिया गया। दिल्ली की पांच जनवरी की बैठक में लोगोें को छावनी अधिनियम की जटिलताओं से राहत मिलने की उम्मीद जताई है।  

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