स्वतंत्रता दिवस 2019: देश को समर्पित है ये गांव, यहां के लोगों की देशभक्ति का नहीं कोई जवाब
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प्रथम विश्व युद्ध से लेकर स्वतंत्रता संग्राम और आजादी के बाद गांव के वीरों से अपने शौर्य का लोहा मनवाया है। उत्तराखंड में रुद्रप्रयाग जिले के जखोली विकासखंड का लुठियाग गांव देश सेवा के लिए समर्पित है।
जिले का दूरस्थ लुठियाग गांव अपना विशेष स्थान रखता है। ढाई सौ से ज्यादा परिवार वाले इस गांव में वर्तमान समय में 40 से अधिक लोग सेना और 20 से अधिक अर्द्धसैनिक बलों व पुलिस में कार्यरत हैं। बीते पांच-छह वर्षों से गांव के कम से कम 5 युवा प्रतिवर्ष सेना की पासआउट परेड का हिस्सा बनते आ रहे हैं। गांव में 40 से अधिक पूर्व सैनिक भी हैं, जो वर्षों की सेवा कर रिटायर हुए हैं। कुछ ऐसे हैं, जिन्होंने 1662 के भारत-चीन युद्ध में भी हिस्सा लिया है।
मुरारी सिंह का शौर्य किसी पहचान का मोहताज नहीं
प्रथम विश्व युद्ध में गांव के दो सगे भाई मुरारी सिंह व देव सिंह ने अंग्रेजों की तरफ से लड़ाई लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की थी। इन दोनों भाईयों का नाम दिल्ली के इंडिया गेट पर अंकित है। इसके अलावा दिल सिंह और उमराव सिंह सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज का हिस्सा रहे हैं। आजादी के बाद वर्ष 1962, 1971, 1975 और 1999 के कारगिल युद्ध में भी यहां वीर सपूतों ने अपना पराक्रम दिखाया है।
लुठियाग गांव के 14वीं राष्ट्रीय रायफल के लांस नायक मुरारी सिंह का शौर्य किसी पहचान का मोहताज नहीं है। 14 जून 2000 को आतंकवादियों से लड़ते हुए वे जम्मू क्षेत्र में शहीद हो गए थे। मरने से पहले उन्होंने दो दुश्मनों को अपनी बंदूक से ढेर कर दिया था। बीते वर्ष शहीद का बड़ा बेटा भी सेना में भर्ती हो चुका है।