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ये दो मच्छर दे रहे हैं दून को डेंगू का 'डंक'

Sun, 06 Oct 2013 09:00 PM IST
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 06 Oct 2013 09:00 PM IST
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increased patients with dengue in dehradun

देहरादून जिले में इन दिनों डेंगू के डंक का कहर चरम पर है। आम आदमी से लेकर मंत्री तक इसकी चपेट में हैं। घर के अंदर और घर के बाहर पाई जाने वाली डेंगू मच्छर की दो प्रजातियों ने शहरवासियों को परेशान कर रखा है।

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एक शोध में पता चला है कि डेंगू का हमला सितंबर में तेजी से बढ़ता है। अक्तूबर में काफी तेजी आ जाती है। नवंबर तक यह खासा जानलेवा हो जाता है। इसका मतलब यह हुआ कि अक्तूबर और नवंबर माह दूनवासियों पर भारी गुजरने वाला है।
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मच्छरों की पहचान की जा चुकी

डीएवी कालेज के जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष डा.आरके जौहरी, डीबीएस की प्रवक्ता डा. एन पामोला और शोधार्थी ऋत्विक मंडल दो साल से डेंगू की बीमारी पर शोध कर रहे हैं।
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अब तक दून में डेंगू की बीमारी फैलाने वाले एडीज इजिप्टाई (घर के अंदर मिलता है) और एडीज एल्बोपिक्टस (घर के बाहर पाया जाता है) मच्छरों की पहचान की जा चुकी है। तीसरा एडीज विटेटस शक के दायरे में है। शोध के मुताबिक जिले में एडीज मच्छर की 12 प्रजातियां हैं।

बरसात के बाद पनपते हैं डेंगू मच्छर
शोध में पता चला है कि दून में डेंगू के मच्छर बरसात के बाद पनपते हैं। आंकड़े बताते हैं कि बरसात के बाद के महीनों में दून में रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। शोधकर्ताओं ने तीन साल के डेंगू के रोगियों के आंकड़ों के आधार पर यह दावा किया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि बारिश के बाद नमी और घरों के आसपास जमा होने वाला पानी एडीज मच्छरों को जन्म देता है।

सीएसआईआर का प्रोजेक्ट
डा.आरके जौहरी ने बताया कि तीन वर्षीय यह शोध वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के प्रोजेक्ट ‘सर्विलिएंस ऑफ एडिस मास्क्यूटो विद स्पेशल रेफरेंस टू इस्टैबिलिशमेंट ऑफ डेंगू इन डिस्ट्रिक्ट देहरादून’ के तहत किया जा रहा है। शोध का कार्य वर्ष 2014 तक पूर्ण हो जाएगा। इस कार्य में दिल्ली के नेशनल सेंटर फोर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) और मदुरै के सेंटर फोर रिसर्च इन मेडिकल एंटोमोलॉजी की सहायता ली जा रही है।


किस साल और किस माह में कितने डेंगू रोगी

वर्ष जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर
2010 0 2 19 372 2252 241
2011 6 7 30 159 213 35
2012 1 1 10 34 230 154

(आंकडे़ डिस्ट्रिक वैक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल आफिस के मुताबिक)

डेंगू मच्छर की ऐसे करें पहचान और बचाव
डेंगू के मच्छर को टाइगर मासक्यूटो कहा जाता है। इसके पेट पर धारियां होती हैं। इसका रंग गाढ़ा काला होता है, जिससे इसकी धारियां चमकती रहती हैं। डेंगू मच्छर ज्यादा ऊंचाई पर नहीं उड़ पाता है।

डेंगू मच्छर हरी मिर्च के पेड़ के आसपास खूब पनपता है लेकिन यदि वहां गेंदा का पेड़ रख दिया जाए तो उससे दूर भाग जाता है। यह दिन में ही सक्रिय होता है। शाम ढ़लते ही इसकी शक्ति खत्म हो जाती है। बचाव के लिए मुख्यतौर पर शरीर के अंगों को ढककर रखें। इसके अलावा क्रीम और कॉइल का प्रयोग कर सकते हैं।



गत छह वर्षों में डेंगू के मामले

वर्ष मामले
2006 12
2007 21
2008 140
2009 25
2010 2889
2011 454
2012 439
2013 (अब तक) 82


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