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संवासिनियों की कमाई पर कुंडली मारे हैं अधिकारी
आशीष डोभाल/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 01 Feb 2016 12:54 PM IST
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सीएम, डीएम, सचिव, निदेशक, सीडीओ, डीडीओ सहित तक दर-दर की दरख्वास्तों के बाद अमर उजाला को अपनी दासंता सुनाते हुए पूर्व में संवासिनी और केयर-टेकर रही सर्वेश ने इंसाफ की गुहार लगाई।
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उसने बताया कि वह किडनी में पथरी होने के कारण इतनी मजबूर है लेकिन कोई उसकी सुनने वाला नहीं है। उसने बताया कि उसके ही साथ की तीन और केयर टेकर रही संवासिनियां भी ऐसे ही अपने किए हुए काम की तनख्वाह के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही हैं लेकिन पिछले दो साल से कोई सुनने वाला नहीं है।
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रविवार को दीपनगर में अपने किराये कमरे में दासतां सुनाते वक्त उसके आंसु छलक आए बोली, साहब महिला/समाज कल्याण में सब अधिकारी, नेता अपना कल्याण करने में लगे हैं। बोली, कि कई बार सीएम जनता दरबार, डीएम, सचिव, निदेशक समाज कल्याण, डीडीओ, सीडीओ, जिला प्रोवेशन अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, रेडक्त्रसस सोसायटी जनपद देहरादून सहित कई तमाम जिम्मेदार सरकारी सिस्टम में उसने गुहार लगाई लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
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हरिद्वार सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से राजकीय नारीनिकेतन देहरादून शिफ्ट होने के बाद उन्हें सहित अन्य तीन को मानसिक रूप से विक्षिप संवासिनियों के लिए केयर टेकर के पद पर नियुक्त किया गया। उसने कहा कि हम विभाग सहित सरकार व सरकारी सिस्टम से भीख नहीं मांग रहे।
हमने इस दौरान विक्षित महिलाओं के गंदे कपड़े धोए, उनका मल-मूत्र साफ किया लेकिन उनकी संवासिनी रहते वक्त की कमाई से भी सरकारी सिस्टम अपनी जेबें भर रहा है। उन्होंने अपना एक्स-रे दिखाते हुए कहा कि उनके हार्ट और किडनी के बीच एक तार जुड़ा है जिससे उनकी जान को खतरा न हो। पैसा न होने कारण वह उसे दूरबीन विधि से ऑपरेट नहीं करवा पा रही हैं। उन्होंने शहर के ही इंदिरेश हॉस्पिटल में एक्सपर्ट डॉक्टर से महंगा इलाज करवाना है।
किडनी से पथरी लगी होने कारण उनकी
जान को भी खतरा है लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं। किडनी में पथरी है लेकिन सरकारी सिस्टमउसकी 22 माह की तनख्वाह पर कुंडली मारे बैठे है, कहते हैं कि बजट ही नहीं है। इस बीच उन्हें सिर्फ एक चेक पिछले साल 17 अप्रैल में जारी हुआ। वहीं वह कहती हैं कि नारी निकेतन में उन्होंने संवासिनी रहने के साथ ही केयर टेकर के तौर पर काम किया।
उसके एवज में उन्हें सहित अन्य तीन अन्य तीन संवासिनियों की तनख्वाह पिछले एक साल से नहीं मिल रही है। उन्होंने निदेशक महिला/समाज कल्याण हल्द्वानी का एक पत्र अमर उजाला संवाददाता को दिखाया जिसमें साफ-साफ लिखा है कि तीन लाख दस हजार रुपये इन संवासिनियों का भुगतान वित्तीय वर्ष 2014-15 में लेखा शीर्षक 2235, 02, 103, 07 के अंतर्गत रेडक्त्रसस सोसाईटी जनपद देहरादून को दिए गए रु. 5 लाख रुपये की धनराशि से किया जा चुका है। ऐसे में ये पैसा कहां गया, किसने खाया ये सबसे बड़ा सवाल है?
किसकी कितने माह की तनख्वाह पर कुंडली मारे हैं अधिकारी
सर्वेश- 25.01.2013 से 09.07.2014- 22 माह- रु.1,10,000 देय-30,000
ललिता- 25.01.2013 से 15.7.2014- 17 माह- रु.85,000
रोशनी- 25.01.2013 से 18.03.2014- 13 माह- रु.65,000
सुंदरी- 25.01.2013 से 31.05.2014- 16 माह- रु.80,000