सरकारी नौकरी के लिए आय प्रमाण पत्र को लेकर बेहद जरूरी खबर, ध्यान नहीं दिया तो पछताएंगे
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सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सरकारी भर्तियों में आरक्षण देने के लिए अनिवार्य आय प्रमाण पत्र का प्रारूप जारी कर दिया है। आठ लाख रुपए से कम आय वाले परिवारों को इसके तहत लाभ दिया जाना है।
कार्मिक विभाग ने प्रमाण पत्र के तहत होने वाली नियुक्तियों के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। उत्तराखंड लोकसेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा आयोग सहित अन्य विभागीय भर्तियों में यह प्रमाण पत्र धारक को ही आरक्षण लाभ मिलेगा।
राज्याधीन लोक सेवाओं और पदों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण लाभ देने के लिए आय प्रमाण पत्र की व्यवस्था लोक सेवा अधिनियम 2019 में की गई है। अधिनियम की धारा 7 में यह प्रावधान है कि आरक्षण के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकारी और प्रारूप तक किया गया है।
आय एवं संपत्ति प्रमाण पत्र जिलाधिकारी, अतिरिक्त जिलाधिकारी, सिटी मजिस्ट्रेट, उप जिलाधिकारी एवं तहसीलदार जारी कर सकता है। अभ्यर्थी जिस जिले का निवासी होगा अथवा उसका जन्म हुआ हो और वांछित औपचारिकताएं पूरी कराकर निर्धारित प्रपत्र हासिल कर सकता है।
यह रहेंगे प्रावधान
- सक्षम अधिकारी के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आय एवं संपत्ति प्रमाण पत्र के प्रयोजन से परिवार के विभिन्न स्थानों या शहरों में अर्जित भूमि और संपत्ति को संयोजित करते हुए सम्यक परीक्षणोपरांत आवेदक को दस्तावेज जारी किया जाएगा।
- नियुक्ति प्राधिकारी आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के अभ्यर्थियों के लिए सेवा नियमों के अनुसार, चरित्र, पूर्ववृत्त सत्यापन के साथ आय एवं संपत्ति प्रमाण पत्र का सत्यापन करवाए जाने तक अभ्यर्थी की नियुक्ति अंतिम रखी जाएगी।
- प्रमाण पत्र धारक अभ्यर्थी का दस्तावेज जाली या गलत पाए जाने पर ऐसी नियुक्ति स्वत: समाप्त समझी जाएगी।
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आय एवं संपत्ति प्रमाण पत्र संबंधित पद के विज्ञापन पद के विज्ञापन में आवेदन की अंतिम तिथि तक निर्गत प्रमाण पत्र मान्य होंगे।
यह है मानक
- सालाना आठ लाख रुपये से कम आय होनी चाहिए।
- कृषि भूमि पांच एकड़ या उससे अधिक नहीं होना चाहिए।
- आवासीय भवन एक हजार वर्ग फुट या उससे अधिक न हो।
- नगरपालिकाओं में सौ वर्ग गज या उससे अधिक के आवासीय भूखंड न हों।
- नगरपालिकाओं के अलावा अन्य क्षेत्रों में दो सौ गज या उससे अधिक भूखंड न हों।