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कौशल्या नंदन के बदले, निज सुत को राज मांगती हूं...

Fri, 04 Oct 2019 01:45 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 04 Oct 2019 01:45 AM IST
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In lieu of Kaushalya Nandan, I ask Nij Sut to rule
लो सुनो प्राणपति, प्राणनाथ, वह थाती आज मांगती हूं। कौशल्या नंदन के बदले, निज सुत को राज मांगती हूं...। कोपभवन में कैकेयी के इन वचनों को सुनकर दशरथ आवाक रह जाते हैं। दशरथ इससे पहले कि कुछ कहते कैकेयी उन्हें रघुकुल की रीत याद दिला देती है। अंत में राजा दशरथ को इन वचनों के वशीभूत होकर राम को वनवास और भरत का राज्यभिषेक करने का आदेश देना पड़ता है।
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श्री रामलीला कला समिति की ओर से 151वें रामलीला महोत्सव में श्रीराम-सीता विवाह, राज्य अभिषेक तैयारी और कैकेयी संवाद का मंचन किया गया। जिसमें प्रभु श्रीराम के राजतिलक की तैयारी चल रही होती है। तभी मंथरा ने राजमहल में कैकयी को भड़का दिया। जिस पर कैकयी ने राजा दशरथ से दो वचन में भरत को राजतिलक व श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मांग लिया। राजा दशरथ को वचन पूरा करना पड़ा और वह मूर्छित हो गए। इसके बाद सीता व लक्ष्मण के साथ श्रीराम का वन गमन हुआ। मंचन के दौरान रविंद्र नाथ मांगलिक सोम प्रकाश शर्मा, राकेश भंडारी, महेश गर्ग, राकेश महेंद्रू, हर्ष कुमार अग्रवाल, मनमोहन जायसवाल, विक्की गोयल, धनश्याम शर्मा आदि मौजूद रहे।
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हनुमानजी ने लगाई सोने की लंका में आग
देहरादून। श्री आदर्श रामलीला कमेटी की ओर से चुक्खूवाला में आयोजित रामलीला में राम-सुग्रीव मित्रता से लेकर लंका दहन तक का मंचन किया गया। इससे पहले जामवंत हनुमान जी को उनकी शक्तियां याद दिलाते हैं, फिर हनुमान समुद्र पार कर लंका पहुंच जाते हैं। जहां वह सीता जी को खोजते-खोजते अशोक वाटिका पहुंचते हैं। वहां सीता से उनकी मुलाकात होती है। इसके बाद सभा में हनुमान व रावण के बीच संवाद होता है। रावण दंड स्वरूप हनुमान की पूंछ में आग लगाने के आदेश देता है। हनुमान की पूंछ में आग लगते ही वह पूरी लंका में आग लगा देते हैं। मंचन के दौरान अध्यक्ष संतराम शर्मा, अर्जुन सोनकर, राजेंद्र सभरवाल, प्रियांशु शर्मा, राजेंद्र ममगाईं, राजकुमार शर्मा आदि मौजूद रहे।
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राम के वियोग में दशरथ ने त्यागे प्राण
देहरादून। रेसकोर्स स्थित श्री रवि मित्तल मेमोरियल पब्लिक जूनियर हाईस्कूल में पर्वतीय रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित रामलीला महोत्सव में रामलीला में राम केवट संवाद, दशरथ मरण, भरत मिलाप की लीला का मार्मिक मंचन हुआ। जिसको देखकर रामभक्त भावुक हो गए और जय श्रीराम के उद्घोष के साथ पंडाल गुंजायमान हो गया। बनवासी राजा राम गंगा नदी पार करने के लिए गंगा किनारे पहुंचते है तो उनकी मुलाकात केवट मल्लाह से होती है। रामनाम के उच्चारण मात्र से ही लोग तर जाते है। राम के अयोध्या वापस नहीं लौटने की खबर पाकर दशरथ बिलख उठते है। बनवास की खबर सुनकर भरत क्रोधित हो उठते हैं और कैकेयी को बुरा भला कहकर राम की तालाश में नंगे पैर ही जंगल की ओर निकल जाते है। जहां राम-भरत का भावुक व मार्मिक मिलाप होता है।

मंचन के दौरान जीवन सिंह बिष्ट, ललित चंद्र जोशी, मदन मोहन जोशी, जीसी भट्ट, बची सिंह बिष्ट, प्रदीप, पुष्का सिंह रौतेला, चंदन सिंह बिष्ट, मनोज मैखुरी, पूरन सिंह राणा आदि मौजूद रहे।

झंडे बाजार स्थित रामलीला कला समिति द्वारा आयोजित श्री रामलीला में लीला का मंचन करते कलाकार ।

झंडे बाजार स्थित रामलीला कला समिति द्वारा आयोजित श्री रामलीला में लीला का मंचन करते कलाकार ।

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