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खूब खेला सिंदूर, दी मां को विदाई
अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 15 Oct 2013 11:42 AM IST
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नवरात्र के बाद सोमवार को देहरादून में जगह-जगह मां दुर्गा को विदाई दी गई।
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ढाकियों की धुन पर नाचते हुए महिलाओं ने एक-दूसरे के साथ सिंदूर खेला। देवी मूर्ति के विसर्जन के बाद नदी से लाया गया जल श्रद्धालुओं और आयोजन स्थल पर छिड़का गया। शाम को सभी ने एक-दूसरे के घर जाकर विजय-दशमी की बधाई दी।
महिलाओं ने किया धनुची नृत्य
शहर के पंडालों से अलग-अलग समय पर देवी की विदाई की गई। दुर्गाबाड़ी से दोपहर 12.30 बजे देवी को विदा किया गया। इससे पहले पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने धनुची नृत्य किया।
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घर से पूजा की थाली में सिंदूर लाई महिलाओं ने एक-दूसरे को टीका लगाया और मिठाई खिलाई। देवी को अरबी के साग और चावल का भोग लगाया गया। पूर्जा अर्चना के बाद देवी की मूर्ति को विसर्जन के लिए हरिद्वार ले जाया गया।
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बंगाली लाइब्रेरी में भी सुबह से ही देवी की विशेष पूजा-अर्चना शुरू हो गई थी। एक-दूसरे को सिंदूर लगाने के साथ ही दोपहर तीन बजे के करीब देवी की मूर्ति को विसर्जन के लिए ले जाया गया।
विशेष पूजा-अर्चना
पूजा समिति के अध्यक्ष राजीव दत्ता ने बताया कि मूर्ति मालदेवता में प्रवाहित की गई। इसके बाद शाम को शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। रायपुर ओएलएफडी में भी देवी की विशेष पूजा-अर्चना की गई।
इसके पश्चात मूर्ति विसर्जन के लिए गई। इसके अलावा आराघर, कांवली रोड सहित सभी जगह से देवी की विदाई के साथ ही कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
मां बन जाती है बेटी
पांच दिनों तक देवी मां को परिवार सहित पूजा जाता है। दुर्गा मां सहित लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिक, गणेश का भी पूजन होता है। माना जाता है कि बेटी (देवी) अपने परिवार संग मायके आई है।
ससुराल जाते हुए बेटी की मांग भरी जाती है, सिंदूर लगाया जाता है और मिष्ठान खिलाया जाता है। सोमवार को बेटी की विदाई करते हुए सभी भावुक हो उठे।
दूर-दूर से आईं महिलाएं
दुर्गाबाड़ी में लंबे समय तक पूजन करने वाले परिवार भले ही अब बाहर शिफ्ट हो गए हैं, लेकिन अब भी दुर्गापूजा पर दून जरूर आते हैं। दिल्ली से आई सुजाता चक्रवर्ती ने बताया कि यहां एकदम परिवार जैसा माहौल लगता है।
इसलिए यहीं आकर पूजा करना अच्छा लगता है। आसाम से आई शंपा भी परिवार संग यहां आई हुई हैं। दिल्ली से अनंदिता बोस भी यहां पूजा के लिए पहुंची हुई हैं।
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