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हिमालय के बिना हिमालयी रीजन की कल्पना बेमानी : डॉ. जोशी
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देहरादून। हिमालयन के सत्त विकास में हम सभी को अपनी जिम्मेदारी निभारी होगी। हिमालय दुनिया की सबसे अधिक बदलाव वाली रचना है। इसमें हर स्तर पर बहुत तेजी से बदलाव हो रहे हैं। हिमालय कान्क्लेव 2022 में विशेषज्ञ वक्ताओं ने विस्तृत अध्ययन और शोध पत्र प्रस्तुत करते हुए ये बातें कहीं।
आईसीएआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सॉइल एंड वाटर कंजर्वेशन सभागार में शनिवार को स्पर्श हिमालय की ओर से हिमालय कान्क्लेव का आयोजन किया गया। पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि हिमालय के बिना हम इस पूरे हिमालयी रीजन की कल्पना भी नहीं कर सकते। हिमालय पर हर साल लाखों टन बर्फ जमा होती है और लाखों टन पानी यहां से निकलता है। पद्मश्री बसंती बिष्ट ने कहा कि हिमालय हमारे लोक जीवन का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। हमारे गीत संगीत, खानपान, वेशभूषा सभी में हिमालय दिखता है। कल्याण सिंह रावत ने कहा कि हिमालय पर हर साल लाखों पेड़ लगाए जा रहे हैं, जो वहां की पारिस्थितिकी को बेहतर बना रहे हैं। पूर्व शिक्षा मंत्री व हरिद्वार सांसद डॅा. रमेश पोखरियाल निशंक कार्यक्रम से ऑनलाइन जुड़े। उन्होंने कहा कि हमने कई वर्ष पहले स्पर्श गंगा कार्यक्रम की शुरूआत की थी। हिमालय, गंगा हमारे संसाधन हैं। अन्य वक्ताओं ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य हिमालय को प्रोटेक्शन देने के लिए विशेषज्ञों से चर्चा करना और समाधान ढूंढने पर है। इस दौरान डॉ. जेपी पचौरी, डीजीपी अशोक कुमार, स्पर्श हिमालय की सीमा शर्मा, जेपी पचौरी, डॉ. सविता मोहन, पूनम चंद, एडिशनल डायरेक्टर टूरिज्म डिपार्टमेंट, कालाचांद साईं वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के निदेशक मौजूद रहे।
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आईसीएआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सॉइल एंड वाटर कंजर्वेशन सभागार में शनिवार को स्पर्श हिमालय की ओर से हिमालय कान्क्लेव का आयोजन किया गया। पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि हिमालय के बिना हम इस पूरे हिमालयी रीजन की कल्पना भी नहीं कर सकते। हिमालय पर हर साल लाखों टन बर्फ जमा होती है और लाखों टन पानी यहां से निकलता है। पद्मश्री बसंती बिष्ट ने कहा कि हिमालय हमारे लोक जीवन का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। हमारे गीत संगीत, खानपान, वेशभूषा सभी में हिमालय दिखता है। कल्याण सिंह रावत ने कहा कि हिमालय पर हर साल लाखों पेड़ लगाए जा रहे हैं, जो वहां की पारिस्थितिकी को बेहतर बना रहे हैं। पूर्व शिक्षा मंत्री व हरिद्वार सांसद डॅा. रमेश पोखरियाल निशंक कार्यक्रम से ऑनलाइन जुड़े। उन्होंने कहा कि हमने कई वर्ष पहले स्पर्श गंगा कार्यक्रम की शुरूआत की थी। हिमालय, गंगा हमारे संसाधन हैं। अन्य वक्ताओं ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य हिमालय को प्रोटेक्शन देने के लिए विशेषज्ञों से चर्चा करना और समाधान ढूंढने पर है। इस दौरान डॉ. जेपी पचौरी, डीजीपी अशोक कुमार, स्पर्श हिमालय की सीमा शर्मा, जेपी पचौरी, डॉ. सविता मोहन, पूनम चंद, एडिशनल डायरेक्टर टूरिज्म डिपार्टमेंट, कालाचांद साईं वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के निदेशक मौजूद रहे।
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