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गोल्डन जुबली मानएंगे 'इमरजेंसी' के ऑफिसर
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 20 Dec 2013 01:01 PM IST
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चीन युद्ध से सबक लेकर भारतीय सेना ने आफिसर्स की संख्या बढ़ाने के लिए पहल की थी। युद्ध के दौरान ही सेना में अफसरों की संख्या बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर भर्तियां हुईं।
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1963 में भारतीय सैन्य अकादमी से 35वां नियमित कोर्स और दूसरा इमरजेंसी कोर्स पासआउट हुआ था जिसकी आईएमए में गुरुवार से रियूनियन का समारोह शुरू हुआ है।
अब तक का सबसे बड़ा बैच
सेना के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा बैच रहा है, जिसमें एक साथ सेना को 1448 यंग आफिसर्स मिले। आईएमए में गोल्डन जुबली समारोह में 80 रिटायर्ड अफसर परिवार सहित पहुंचे हैं।
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कमांडेंट आईएमए, लेफ्टिनेंट जनरल मानवेंद्र सिंह ने रियूनियन बैच का खेत्रपाल स्टेडियम में स्वागत किया। भारतीय सैन्य अकादमी की प्रत्येक पीओपी के बाद पुराने कोर्स की रियूनियन की परंपरा है, जिसके तहत कोर्स पहुंचा है।
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फिर से हुई थी चयन प्रक्रिया
इमरजेंसी कोर्स होने के चलते पांच वर्ष की सेवा के बाद युवाओं को दोबारा चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, जिसमें एक तिहाई ही नियमित सेवा में आ सके। सेना छोड़ने वाले अधिकारी बाद में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस सहित कई अन्य सेवाओं में शामिल हुए।
अन्य सेवाओं में गए अधिकारी भी रियूनियन में पहुंचेंगे। 20 दिसंबर तक यह पूर्व अफसर विभिन्न समारोह का हिस्सा बनेंगे।