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 Uttarakhand News: नए निकायों की सैकड़ों बीघा जमीन पर हो रहे अवैध कब्जे, प्रशासन स्तर से ढिलाई

Mon, 23 May 2022 07:29 PM IST
रेनू सकलानी आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 23 May 2022 07:29 PM IST
सार

पिछले साल हरिद्वार जिले में ढंडेरा, इमलीखेड़ा, रामपुर, पाडली गुर्जर को नगर पंचायत बनाया गया। ऊधमसिंहनगर जिले में लालपुर, सिरोरीकलां, नगला को और बागेश्वर जिले में गरुड़ व पौड़ी जिले में थलीसैंण को नगर पंचायत का दर्जा दिया गया।

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Illegal occupation of new bodies land in Uttrarakhand, Cm pushkar singh dhami,Trivendra Sarkar
जमीन - फोटो : i stock

विस्तार

ग्रामीणों को शहरी सुख-सुविधाएं देने के लिए सरकार ने नए निकाय तो बना दिए लेकिन इनके हिस्से में आने वाली जमीन को इन्हें सुपुर्द नहीं किया गया। इस वजह से खाली पड़ी ग्राम समाज की इन सैंकड़ों बीघा जमीनों पर बड़े पैमाने पर कब्जे चल रहे हैं। शहरी विकास निदेशालय की ओर कई बार इस संबंध में संबंधित जिलों के डीएम को पत्र भेजे जा चुके हैं।

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इन पत्रों में जमीनों पर हुए अवैध कब्जों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि जमीन निकायों के सुपुर्द की जाए। पूर्ववर्ती त्रिवेंद्र सरकार और फिर पुष्कर सिंह धामी की सरकार में कई गांवों को मिलाकर नगर पंचायतें बनाने का सिलसिला जारी है। पिछले साल हरिद्वार जिले में ढंडेरा, इमलीखेड़ा, रामपुर, पाडली गुर्जर को नगर पंचायत बनाया गया।
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ऊधमसिंहनगर जिले में लालपुर, सिरोरीकलां, नगला को और बागेश्वर जिले में गरुड़ व पौड़ी जिले में थलीसैंण को नगर पंचायत का दर्जा दिया गया। इससे पहले सेलाकुई सेंट्रल होप टाउन का नगर पंचायत का दर्जा मिला था। आसपास के कई गांवों को मिलाकर यह नगर पंचायतें अस्तित्व में तो आ गई, लेकिन इनके पास आज तक भी अपनी जमीनें नहीं हैं। जो ग्राम समाज की जमीनें इन्हें मिलनी चाहिए थीं, वह आज तक नहीं मिली।
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पहले उन जमीनों की निगरानी में पटवारी की भूमिका अहम होती थी लेकिन नगर पंचायतें बनने के बाद वह भी नहीं रही। लिहाजा, इन लावारिस पड़ी जमीनों पर प्रदेेशभर में बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे हो रहे हैं। नगर पंचायतों के परिक्षेत्र में होने के बावजूद वह इन कब्जों को रोकने में अक्षम हैं। 
 

जमीनें मिली तो यह होगा फायदा

शहरी विकास निदेशालय की ओर से कई बार नई नगर पंचायतों की जमीनों को उनके सुपुर्द करने संबंधी पत्र संबंधित जिलों के डीएम को भेजे जा चुके हैं। शासन स्तर पर भी इस तरह की हलचल जरूर मची लेकिन इन जमीनों का कब्जा अब तक इन नगर पंचायतों को नहीं मिला। 

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नगर पंचायतों को अगर ग्राम समाज की यह जमीनें मिली तो उन्हें बड़ा लाभ होगा। इन जमीनों पर वह आम जनता के लिए पार्क से लेकर बैंक्वेट हॉल या अन्य सुविधाएं उपलब्ध करा सकते हैं। इन जमीनों पर संबंधित नगर पंचायत में मार्केट विकसित करने के अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना आदि के तहत गरीबों के लिए सस्ते आवास भी बना सकती हैं।

इस मामले का संज्ञान लिया जा रहा है। सभी नगर पंचायतों की जमीनों को उनके सुपुर्द करने से संबंधित जिलों को फिर से पत्र भेजा जाएगा, ताकि पंचायतों की जमीनों पर अवैध कब्जों पर सख्ती से रोक लग सके।
-ललित मोहन रयाल, निदेशक शहरी विकास

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