ट्रिब्यूनल को कौन बताएगा खनन का यह सच?
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दून घाटी में उपखनिजों के उत्खनन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के पूछे सवाल का जवाब यही है कि जिले की 13 प्रमुख नदियां तो दूर कोई सूखा, बरसाती नाला भी ऐसा नहीं बचा है जहां खनन माफिया की जेसीबी का पंजा न चल रहा हो।
पूरे जिले में हर रोज औसत 500 वाहन रेत, बजरी, पत्थर लेकर रात से सुबह तक दौड़ लगाते हैं। माफिया ने राजाजी नेशनल पार्क और आसन वेटलैंड रिजर्व जैसे आरक्षित वन क्षेत्रों तक भी पांव पसार लिए हैं। लेकिन प्रशासन हो या वन विभाग, खनन कर्मचारी हों या राजस्व कर्मचारी, कहीं किसी को न ये वाहन नजर आते हैं, न ही नदियों का चिरा हुआ सीना। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार खनन की यह सच्चाई एनजीटी को दिए जाने वाले जवाब में पेश करेगी?
यहां है चुगान की अनुमति
पछवादून में यमुना नदी में डाकपत्थर, हरिपुर बाड़वाला और ढकरानी में चुगान की अनुमति दी गई है। इसके अलावा सभी नदियों पर किसी भी प्रकार के चुगान और खनन पर प्रतिबंध है।
ये हैं जिम्मेदार विभाग
खनन विभाग के साथ ही राजस्व, पुलिस और वन विभाग की अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई करने की जिम्मेदारी है, लेकिन सब आंखें मूंदे हुए हैं।
बेरोकटोक चीरा जा रहा नदियों का सीना
-राजधानी के आसपास के क्षेत्रों में बिंदाल, रिस्पना और अन्य बरसाती नालों से उठाई जाती है रेत, बजरी
-विकासनगर तहसील के अंतर्गत यमुना, टौंस और आसन के साथ ही बरसाती नदी स्वारना, शीतला, कोट, मोठ, अमलावा आदि नदियों में
-डोईवाला तहसील के अंतर्गत सुसवा, सौंग, जाखन नदियों और आरक्षित वन क्षेत्रों से बहने वाली बरसाती नदियों में
खनन के क्षेत्र
-राजधानी के पास मोथरोवाला, जाखन, रिस्पना के किनारे बसी बस्तियों, दूधली, रायपुर, खट्टापानी, फांदोंवाला, कैमरी, बालावाला, हर्रावाला
-विकासनगर तहसील क्षेत्र में विकासनगर, सेलाकुई, प्रेमनगर, नंदा की चौकी, धौलास, धूलकोट, हरबर्टपुर आदि क्षेत्र
-डोईवाला तहसील क्षेत्र में हर्रावाला, कुआंवाला, नकरौंदा, गूलरघाटी, दूधली, नांगल बुलंदावाला, मोथरोवाला, बुल्लावाला, कुड़कावाला, कालूवाला, बड़ोवाला, माजरी और रानीपोखरी
बरसात में नदियां मचाएंगी तबाही
विकासनगर और डोईवाला क्षेत्र में नदियों में जिस तरह बेतरतीब खनन किया जा रहा है, उससे इनके किनारे बसे गांवों में बरसात में तबाही मचना तय है। नदियों में जगह-जगह गहरे गड्ढे हो गए हैं। इसके अलावा खनन करने वालों ने नदियों के बीचोंबीच पत्थरों, रेत, बजरी के ढेर लगा दिए हैं। इससे नदियों के धारा की दिशा बदलने का खतरा बढ़ गया है।
चोर रास्तों से निकलते हैं वाहन
र्डोईवाला क्षेत्र में खनन माफिया वन विकास निगम के गेट से निकलने के बजाय चोर रास्तों से खनन सामग्री लेकर निकलते हैं। सूत्र बताते हैं कि वन कर्मियों को इसकी जानकारी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जाती।
90 दिन में 80 चालान
डोईवाला में अवैध खनन रोकने के लिए तहसील प्रशासन, खनन विभाग और पुलिस की ओर से कार्रवाई में तीन माह में 80 से अधिक वाहनों को चालान किया गया है। इनमें सर्वाधिक ट्रैक्टर ट्राली, डंपर और जेसीबी का चालान हुआ है, जिन्हें अवैध खनन में लिप्त पाया गया है।
आंकड़े बता रहे हैं कि अवैध खनन में औसतन एक या दो वाहन प्रतिदिन सीज किए जाते हैं। हालांकि, खनन में जुटे वाहनों के लिहाज से यह संख्या काफी कम है।
समय हो गया खत्म पर खनन चालू
देहरादून जिले के कालसी में व्यास नहरी के जिला पंचायत सदस्य केशर सिंह नेगी ने एसडीएम को ज्ञापन भेजकर टौंस और यमुना नदी में चल रहे अवैध खनन पर रोक लगाने की मांग की है।
उनका कहना है कि पिछले साल प्रदेश सरकार ने यमुना और टौंस के किनारे काश्त की भूमि पर रेत, बजरी के चुगान की अनुमति दी थी। इसकी समयावधि जनवरी में समाप्त हो चुकी है। मगर अब भी नदी में खनन हो रहा है।
अधिकारियों का है कहना
शिकायत मिलने पर अवैध खनन पर कार्रवाई की जाती है। इस बारे में पुलिस के साथ ही वन एवं खनन विभाग को निर्देशित किया गया है।
-पीके दुम्का, एसडीएम, विकासनगर
मुझे कालसी में खनन की जानकारी मिली है। खनन विभाग से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है। पट्टाधारकों से भी समयावधि संबंधी अभिलेख मांगे हैं। कार्र्रर्वाई की जाएगी।
-अशोक कुमार पांडे, एसडीएम, कालसी
खनन विभाग की टीम लगातार छापेमारी कर रही है। नदियों के पास खनन भंडारण करने वालों पर भी शिकंजा कसा गया है। अवैध खनन रोकने के लिए विभाग प्रतिबद्ध है।
-मणिराम लखेड़ा, खनन निरीक्षक, डोईवाला