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'व्हाइट गोल्ड' माफिया पर कार्रवाई, 110 वाहन सीज

Fri, 21 Nov 2014 04:30 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 21 Nov 2014 04:30 PM IST
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illegal mining in uttarakhand.

देहरादून, हरिद्वार जिले के सीमावर्ती इलाकों में चलाए गए अभियान के दौरान (व्हाइट गोल्ड) खनन सामग्री से लदे करीब 110 वाहन जब्त किए गए।

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इनमें अधिकांश वाहन उत्तरप्रदेश के लोगों के बताए जा रहे हैं, जबकि कुछ हिमाचल से हैं। दोनों जिलों के अधिकारियों को शर्तों का उल्लंघन करने वालों के खनन पट्टे निरस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
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अवैध खनन पर काफी दिनों बाद पुलिस प्रशासन की नींद टूटी है। उत्तर प्रदेश और हिमाचल सीमा से जुडे़ इलाकों में लगातार बड़े पैमाने पर अवैध खनन की शिकायतें थीं।
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कार्रवाई के लिए अवैध खनन निरोधक सतर्कता इकाई सीईओ और डीआईजी संजय गुंज्याल ने अवैध खनन टीम के अलावा थाना पुलिस और तीन प्लाटून पीएसी से लैस आठ टीमें बनाई।

यूपी और हिमाचल सीमा से सटे इलाकों में छापेमारी

illegal mining in uttarakhand.

बुधवार रात टीमों ने देहरादून और हरिद्वार जिले के यूपी और हिमाचल सीमा से सटे इलाकों में छापेमारी की। दून के आशारोडी, झाझरा, कुलाल चेक पोस्ट, नया गांव और धर्मावाला में कार्रवाई के दौरान अवैध खनिज लदे 40 डंपर और ट्रैक्टर-ट्राली जब्त किए गए।

कार्रवाई के दौरान कई चालक वाहन छोड़ भाग निकले। हरिद्वार जिले के लक्सर अमानतगढ़, श्यामपुर, फेरूपुर इब्राहिमपुर आदि क्षेत्रों में रात भर कार्रवाई चली। यहां करीब 70 वाहन अवैध खनन में पकड़े गए।

डीआईजी के मुताबिक अभियान में 400 वाहनों के कागजात चेक किए गए। अवैध खनन लदे वाहन सीज करने के साथ खनिज अधिनियम की धाराओं में केस दर्ज कराया जा रहा है।

दोनों जिलों के पुलिस कप्तानों को आकस्मिक कार्रवाई कर खनन माफिया पर शिकंजा कसने को कहा गया है। सीज अधिकांश वाहन यूपी से हैं। इनमें कई बड़े नाम सामने आए हैं, जिनके खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

बड़े मगरमच्छों पर नहीं कस पाएंगे शिकंजा

illegal mining in uttarakhand.

अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई के लिए पुलिस भले अपनी पीठ थपथपा रही हो, लेकिन इस गोरखधंधे के बड़े मगरमच्छों पर शिकंजा नहीं कस पाएगा।

खेल में सहारनपुर के एक बडे़ माफिया का नाम सुर्खियों में है, लेकिन पुलिस उसके खिलाफ कोई सुबूत नहीं जुटा सकी है। ऐसे ही हिमाचल प्रदेश के भी एक खनन माफिया का नाम चर्चा में है।

इसलिए पुलिस रह जाती है नाकाम
 1- अवैध खनन में पकड़ी गई गाड़ियां अक्सर दूसरों के नाम दर्ज होती हैं। ऐसे में पकड़े जाने के बावजूद पुलिस मास्टर माइंड तक पहुंच नहीं पाती है।
2 - नदियों के आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों की मिलीभगत भी माफिया का काम आसान कर देती है। ऐसे लोग पुलिस कार्रवाई की सूचना भी माफिया को पहुंचाते रहते हैं।
3- माफिया को राजनीतिक संरक्षण भी हासिल होता है। वाहनों की धरपकड़ या कारिंदों को पकड़ने पर राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस कार्रवाई करने में लाचार हो जाती है।

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