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अवैध निर्माण से चमचमा रही राजधानी

Wed, 13 Nov 2013 12:15 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 13 Nov 2013 12:15 AM IST
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illegal construction in dehradun
एमडीडीए राजधानी में स्ट्रीट लाइट लगवाने से लेकर सड़क बनाने का काम कैसे कर रहा है। इसका शायद आपको अंदाजा भी नहीं होगा। शहर में होने वाले अवैध निर्माण को शमन (कंपाउंडिंग) शुल्क लेकर वैध करार दिया जा रहा है। इस शुल्क से होने वाली आय से गली-मोहल्ले की सड़कों को एमडीडीए चमका रहा है।
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राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में औसतन 1400 के आसपास अवैध निर्माण हो रहा है। इसमें से सैकड़ों ऐसे निर्माण अवैध श्रेणी में आते हैं जिनके मानचित्र पास होते हैं। लोग स्वीकृत मानचित्र में फेरबदल कर जाने-अनजाने में निर्माण कर लेते हैं। ऐसे ही निर्माण को वैध करने के लिए एमडीडीए की ओर से शमन शिविर (कंपाउंडिंग कैँप) का आयोजन किया जाता है।
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2009 से ही यह ओअभियान चलाया जा रहा है। एक आंकड़े के अनुसार 2011 से लेकर अब तक दो दर्जन से ज्यादा कैंप लग चुके हैं। इस दौरान 1701 अवैध निर्माण वैध करार दिए गए। इससे 20.47 करोड़ रुपये की कमाई की गई है। इस रकम का इस्तेमाल राजधानी में सड़क और स्ट्रीट लाइट बनाने पर खर्च किया गया है।
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एमडीडीए के लिए सभी अवैध निर्माण ढहाया जाना संभव नहीं है। ऐसे में उस अवैध निर्माण को शमन कर दिया जाता है, जिससे कोई खास नुकसान नहीं होता। इससे आम आदमी और एमडीडीए दोनों को लाभ है। आम आदमी को एमडीडीए के चक्कर से राहत मिल जाती है, जबकि एमडीडीए को राजस्व की आय हो जाती है। इससे विकास कार्य कराने में भी आसानी होती है। -- बंशीधर तिवारी, सचिव एमडीडीए
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