इगास पर्व: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दी बधाई, जुबिन नौटियाल ने सोशल मीडिया पर गाया गीत
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इगास पर्व पर प्रदेशवासियों की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की है।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को इगास पर्व/बूढ़ी दीपावली की बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे लोक पर्व एवं समृद्ध सांस्कृतिक विरासत सामाजिक जीवन में जीवंतता प्रदान करने का कार्य करते हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की है।
इगास पर जुबिन नौटियाल ने गाकर दी शुभकामनाएं
इगास पर्व के मौके पर बालीवुड गायक जुबिन नौटियाल ने गाकर अपनी शुभकामनाएं दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फिर बौड़ी ऐगे इगास बग्वाल, फिर बौड़ी ऐगे इगास बग्वाल, चल द्वारे जौला सभी ऐसु का साल, मिली-जुली मनौला इगास बग्वाल गीत गाया। उसके बाद अपने संदेश में उन्होंने कहा कि इगास हमारी उत्तराखंड की संस्कृति का एक बहुत ही महत्वपूर्व त्योहार है। इसे जोरों-शोरों से बनाएं। प्यार और अमन का नारा दोहराएं। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं दी।
ताकि वीरान होते गांवों में एक बार फिर रौनक लौट सके
उत्तराखंड में लोगों को उनकी जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से भाजपा सांसद अनिल बलूनी ने लोक पर्व इगास को पुनर्जीवित करने की पहल की है। इसके लिए वह वर्ष 2018 से लागातर अभियान चला रहे हैं। इसी पहल के तहत इस बार बलूनी 13 नवंबर को पौड़ी के विकास खंड कोट में स्थित नकोट गांव पहुंचेंगे।
इगास उत्सव: आज भी भैलो की परंपरा को जीवंत रखे हुए हैं रुद्रप्रयाग और चमोली जिले के गांव
14 नवंबर को इगास पर्व ग्रामीणों के साथ मनाने के बाद वह दिल्ली लौट जाएंगे। इसी मुहिम के तहत उन्होंने ‘अपना वोट, अपने गांव’ नामक पहल भी शुरू की, ताकि गांवों से पलायन करने वाले लोग दूरदराज के इलाकों में वापस जा सकें। इस संबंध में अमर उजाला से बातचीत में बलूनी ने कहा कि उनकी कोशिश है कि उत्तराखंड के लोग अपनी जड़ों की ओर लौटें। इसके लिए इगास और अपना वोट अपने गांव एक अच्छा बहाना हो सकता है।
इससे हमारी स्थानीय अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी। दूरदराज के गांवों में पलायन को एक गंभीर समस्या बताते हुए उन्होंने कहा कि इस लोक पर्व को पुनर्जीवित करने का एक उद्देश्य यह भी है कि उत्तराखंड के चीन और नेपाल की सीमा से लगते गांव वीरान न हों। इस अभियान के तहत, उन्होंने लोगों से अपने पैतृक गांवों में वोट दर्ज करने का अनुरोध किया है। ताकि यह गांव पूरी तरह से उजाड़ न हों। भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख और मुख्य प्रवक्ता बलूनी ने कहा कि उत्तराखंड के लोक पर्व को पुनर्जीवित करने के उनके मिशन के पीछे व्यापक विचार उन लोगों को जोड़ना है, जो राज्य से अपनी जड़ों से दूर चले गए हैं।
आज नहीं तो कल इगास उत्तराखंड की पहचान बनेगी
अपने अभियान की प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष राज्य के मैदानी इलाकों में रहने वाले तमाम लोग त्योहार मनाने के लिए अपने गांव लौट रहे हैं। आज नहीं तो कल इगास उत्तराखंड की पहचान बनेगी। जैसे गरबा गुजरात का है और बिहार की छठ पूजा है।
हरीश रावत ने अनिल बलूनी की मुहिम को सराहा
पूर्व सीएम हरीश रावत ने अनिल बलूनी की लोक पर्व इगास को पुनर्जीवित करने और अपना वोट, अपने गांव मुहिम की सराहना की। उन्होंने कहा कि बलूनी इस पहल का स्वागत किया जाना चाहिए। वह अच्छे व्यक्ति हैं, कांग्रेसियों की तरह शाकाहारी व्यक्ति हैं, लेकिन मांसाहारी भाजपाइयों के बीच फंस गए हैं। इसलिए उनकी मुहिम का उतना असर नहीं हो रहा है।
पहाड़ की संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है इगास
वहीं प्रदेश कांग्रेस सचिव महेश जोशी ने लोक पर्व इगास की शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि यह पर्व हमारी संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। जिसे हम दीपावली के ग्यारह दिन बाद एकादशी के दिन मनाते हैं।
उन्होंने कहा कि आज हमारी संस्कृति विलुप्त होती जा रही है, जिसे जीवित रखने के लिए अपने पारंपरिक पर्वों को जिंदा रखना जरूरी है। उन्होंने प्रदेश वासियों से अपील की है कि अपनी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इस लोक पर्व में बढ़ चढ़कर हिस्सा लें। अपनी परंपरा और संस्कृति से अपने बच्चों को भी अवगत कराएं।