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IDPL फैक्ट्री को PM से ‘औषधि’ की दरकार
अनिल नवानी/ अमर उजाला, श्यामपुर-ऋषिकेश
Updated Fri, 11 Sep 2015 11:27 AM IST
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सालों से कोमा में चल रही विख्यात दवा फैक्ट्री आईडीपीएल (इंडियन ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल लिमिटेड) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ‘औषधि’ की दरकार है।
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बीते दशकों तक उत्तराखंड की आर्थिकी की रीढ़ के नाम से चर्चित यह फैक्ट्री कुछ वर्षों से अंतिम सांसें गिन रही है। पीएम के तीर्थनगरी दौरे से लोगों को उम्मीद है कि उनका ध्यान इसकी दशा की ओर जाएगा।
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प्रधानमंत्री मोदी आईडीपीएल हेलीपैड में उतरेंगे और वहीं उनका जनता के साथ रूबरू होने का एक कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि वह फैक्ट्री की स्थिति में सुधार की ओर गौर कर सकते हैं।
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बता दें सोवियत संघ के सहयोग से साल 1962 में स्थापित इस दवा कारखाने में साल 1967 में उत्पादन शुरू हो गया था। मगर सस्ती जीवनरक्षक दवा बनाने वाली इस फैक्ट्री को महज दो दशक में ही ऐसी नजर लगी कि उदारीकरण के दौर में इसे 1992 में बीमार इकाई घोषित कर दिया गया।
वर्तमान स्थिति यह है कि शुरुआती दौर में पांच हजार कर्मचारियों वाली इस फैक्ट्री में वर्तमान में 42 कर्मचारी ही रह गये हैं। विडंबना है कि ढाई दशक बीत जाने के बाद भी केंद्र की अब तक कोई भी सरकार फैक्ट्री के बारे में ठोस निर्णय नहीं ले पाई। जबकि आईडीपीएल के रिवाइवल का प्रस्ताव केंद्र के पास कई वर्षों से लंबित है।
ये हैं हालात
दवा फैक्ट्री की स्थिति यह है कि रखरखाव के अभाव में फैक्ट्री के कई भवन जर्जर स्थिति में आ चुके हैं और गिरने के कगार पर हैं। इसमें करोड़ों की दवा मशीनें संचालन के अभाव में जंक खा रही हैं।
साल 1985 में जिस वक्त गुजरात में प्लेग फैला था, इसी फैक्ट्री ने दवा की आपूर्ति की थी। क्षेत्र की जनता को लगता है कि यदि फैक्ट्री की सुध प्रधानमंत्री ने ली, तो यह राज्य की आर्थिकी में सुधार के लिए मील का पत्थर साबित होगी।