फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   ice skating rink bad condition in maharana pratap sports college dehradun

देहरादूनः विदेशों में भी नहीं ऐसा आइस स्केटिंग रिंक और यहां फांक रहा धूल

Sun, 22 Sep 2019 02:44 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal गौरव ममगाईं, अमर उजाला, देहरादून
गौरव ममगाईं, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 22 Sep 2019 02:44 PM IST
सार

  • यहां आयोजन तो दूर, खिलाड़ियों को प्रैक्टिस का भी नहीं मिलता लाभ
  • उत्तराखंड के खिलाड़ी बाहरी राज्यों में महंगी फीस देकर ले रहे हैं ट्रेनिंग

विज्ञापन
ice skating rink bad condition in maharana pratap sports college dehradun

विस्तार

राजधानी स्थित साउथ-ईस्टर्न एशिया का एकमात्र ‘आइस स्केटिंग रिंक’ सालों से धूल फांक रहा है। महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज रायपुर में बने देश के जिस एकमात्र इंडोर रिंक में इंटरनेशनल, नेशनल आयोजन होने थे, वहां पिछले नौ सालों से एक आयोजन को छोड़कर कोई बड़ा आयोजन नहीं हुआ है। यहां खिलाड़ियों को प्रैक्टिस तक का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि विश्वस्तरीय रिंक होने के बावजूद प्रदेश के खिलाड़ियों को प्रैक्टिस के लिए शिमला, हिमाचल प्रदेश का रुख करना पड़ रहा है। जिस रिंक से प्रदेश का मान बढ़ना था प्रदेश सरकार के पास उसके संचालन के लिए कोई प्रभावी योजना नहीं है। जबकि प्रदेश के कई खिलाड़ी बाहरी राज्यों में ट्रेनिंग लेने को मजबूर हैं।

विज्ञापन


रिंक का इतिहास
महाराणा स्पोर्ट्स कॉलेज में वर्ष-2011 में साउथ-ईस्टर्न एशियन विंटर गेम्स के लिए 80 करोड़ रुपये में इस आइस स्केटिंग रिंक को बनाया गया। इस प्रतियोगिता में भारत के अलावा पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, मालदीव, श्रीलंका ने हिस्सा लिया था। उसके बाद यहां पर्यटन विभाग ने स्पीड स्केटिंग कोर्स का संचालन किया जो जल्द खत्म हो गया। वर्ष 2011-12 में आइस स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने ओपन स्केटिंग प्रतियोगिता कराई। दो-तीन वर्ष बाद रिंक को पर्यटन विभाग ने खेल विभाग को सौंप दिया। तब से यहां कोई आयोजन नहीं हुआ। करीब डेढ़ वर्ष पहले प्रदेश सरकार ने इसका जिम्मा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के संचालन के लिए स्पोर्ट्स-स्टेडियम सोसायटी को सौंपा, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।
विज्ञापन


स्केटिंग में अव्वल रहा भारत
इंटरनेशनल चैंपियनशिप में पांच बार देश का प्रतिनिधित्व कर चुके श्रेय पैन्यूली ने बताया कि भारत में आइस स्केटिंग की लोकप्रियता है। शिमला व लद्दाख में ओपन आइस स्केटिंग और गुड़गांव व मुंबई में इंडोर आइस स्केटिंग होती है। साउथ-ईस्टर्न कंट्री में भारत शीर्ष पर है। जबकि एशिया में चीन, जापान आदि देश शीर्ष पर हैं। उत्तराखंड की बात करें तो प्रदेश ने अभी तक सात इंटरनेशनल मेडल जीते हैं। देश में उत्तराखंड का तीसरे स्थान है।
विज्ञापन
विज्ञापन


विशेषज्ञों के सुझाव
रिंक में नेशनल, इंटरनेशनल प्रतियोगिताएं कराई जानी चाहिए।
इसे खिलाड़ियों के प्रैक्टिस के लिए खोलना चाहिए। प्रैक्टिस फीस कम रखी जाए।
निजी प्रतियोगिताओं के आयोजन भी कराए जाने चाहिए, ताकि आय बढ़ाई जा सके।
रिंक की मरम्मत के लिए इलेक्ट्रिसिटी बिल माफ या कम किया जाए।
स्पोर्ट्स-स्टेडियम सोसायटी को इसके संचालन के लिए ठोस योजना बनानी चाहिए।  

सीमेंट ट्रैक पर आइस स्केटिंग की प्रैक्टिस
एसोसिएशन अध्यक्ष शिव पैन्यूली ने बताया कि इस समय प्रदेश में आइस स्केटिंग की प्रैक्टिस के लिए कोई रिंक नहीं है। मजबूरन स्केटरों को सीमेंट के ट्रैक पर प्रैक्टिस करनी पड़ती है। शिमला में ओपन रिंक में प्रति घंटा प्रैक्टिस का 300 से 400 रुपये फीस है। इसके साथ रहने व खाने का खर्चा मिलाकर महंगा पड़ता है। इस वजह से सभी खिलाड़ी दूसरे राज्य में प्रैक्टिस करने में समर्थ नहीं रहते।

देश का एकमात्र रिंक
आइस स्केटिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष पैन्यूली ने बताया यह देश का एकमात्र इंडोर आइस स्केटिंग रिंक हैं। गुड़गांव, दिल्ली, मुंबई में इंडोर रिंक बनाए हैं, लेकिन वह आकार में छोटे हैं। देहरादन जैसा आइस स्केटिंग रिंक पाकिस्तान, श्रीलंका, मालदीव, नेपाल समेत अन्य पड़ोसी देशों के पास भी नहीं है।

आइस स्केटिंग को जल्द खुलवाया जाएगा, ताकि खिलाड़ियों को इसका लाभ मिल सके। यहां नेशनल, इंटरनेशनल आयोजन कराने के भी प्रयास किए जाएंगे।
- बृजेश कुमार संत, सचिव खेल

बजट को रोना, नहीं हुए प्रयास
आइस स्केटिंग रिंक का प्रतिदिन मरम्मत का खर्च करीब 20 हजार रुपये और मासिक खर्च छह लाख रुपये है। मुख्य खर्चा बिजली का है। रिंक के फ्लोर के नीचे कूलिंग करने के लिए रेफ्रीजरेटर लगे हुए हैं, जिनसे सीमेंटेड फ्लोर के ऊपर बर्फ जमने लगती है। बाहर भी कूलिंग बनानी होती है। विभाग मरम्मत के खर्च को लेकर रोता रहा, लेकिन कभी समाधान खोजने के प्रयास नहीं किए।


प्रदेश सरकार खेलों के विकास के लिए गंभीर है। आइस स्केटिंग रिंक प्रदेश की मुख्य पहचान है। इसके संचालन के लिए प्रभावी योजना बनाने के लिए निर्देशित किया जाएगा, ताकि यहां नेशनल, इंटरनेशनल आयोजन हो सकें।
-अरविंद पांडे, खेल मंत्री

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed