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Dehradun News: दून में नहीं होती सीएनजी किट की हाइड्रो टेस्टिंग, खतरा लेकर दौड़ रहे हजारों वाहन

Wed, 16 Oct 2024 05:09 PM IST
देहरादून ब्यूरो माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Wed, 16 Oct 2024 05:09 PM IST
सार

सीएनजी किट की फिटनेस चेक कराए बगैर ही हजारों वाहन सड़क पर खतरा लेकर दौड़ रहे हैं।

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Hydro testing of CNG kits is not done in Doon, thousands of vehicles are running risking their lives
CNG - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

राजधानी में सीएनजी वाहनों को बढ़ावा देने की पहल चल रही है। निजी, व्यावसायिक वाहनों से लेकर सार्वजनिक सेवा के वाहनों में भी सीएनजी को बढ़ावा दिया जा रहा है। हजारों की संख्या में सीएनजी वाहन दून में सड़क पर चल रहे हैं, लेकिन दून में सीएनजी वाहनों में किट की हाइड्रो टेस्टिंग के लिए परिवहन विभाग का एक भी फिटनेस सेंटर नहीं है।

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सालों से सीएनजी किट की हाइड्रो टेस्टिंग कराए बगैर ही हजारों वाहन सड़क पर खतरा लेकर दौड़ रहे हैं। गौरतलब है कि सीएनजी वाहनों में लगी किट के लिए फिटनेस टेस्ट अनिवार्य है। गैस अथारिटी आफ इंडिया लिमिटेड (गेल) ने भी कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) वाहनों की हाइड्रो टेस्टिंग अनिवार्य कर दी है। नियमों के अनुसार तीन वर्ष में एक बार सिलेंडर का हाइड्रो परीक्षण किया जाना चाहिए। ऐसा न करने पर सीएनजी वाहनों को गैस नहीं देने का प्रावधान है।
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परिवहन विभाग की ओर से हाइड्रो टेस्ट की सुविधा दून में उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में सीएनजी गाड़ियां हादसे का सबब बन सकती हैं। सिलेंडर में तीन साल तक सीएनजी भरने से उसके कमजोर होने की संभावना बढ़ जाती है।
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सील खुलने, टंकी खराब होने व वाल्व खराब होने व लीकेज का खतरा रहता है। सिलेंडर कभी भी फट सकता है। टेस्ट में सिलेंडर को क्षमता के डेढ़ गुना प्रेशर तक मशीन से चेक किया जाता है। इससे यह पता चलता है कि सिलेंडर पूरी तरह फिट है या नहीं। सिलेंडर लोकल है तो यह जांच दो साल में ही करानी चाहिए। लेकिन दून में हाइड्रो टेस्टिंग का कोई सरकारी सेंटर नहीं होने के कारण सीएनजी वाहन खतरे से खेल रहे हैं।
 

हाइड्रो टेस्टिंग को लेेकर परिवहन विभाग को भी कोई सुध नहीं
सीएनजी किट की फिटनेस के लिए पीईएसओ से मान्यता प्राप्त एजेंसियां किट का जांच सर्टिफिकेट जारी करती हैं। इसी सर्टिफिकेट के आधार पर आरटीओ से किट का रिन्युअल लिया जाता है। रिन्युअल सर्टिफिकेट को अब गाड़ी के बोनट के अंदर ही फिट किया जाता है, जिसे सीएनजी पंप सीएनजी देने से पहले चेक करते हैं। आरटीओ में हजारों की संख्या में सीएनजी कार, ऑटो और वैन रजिस्टर्ड हैं। आरटीओ सीएनजी वाहनों की सामान्य फिटनेस तो चेक करता है, लेकिन हाइड्रो टेस्टिंग को लेेकर परिवहन विभाग को भी कोई सुध नहीं है।

यह करें सुरक्षा उपाय
-पंजीकृत सीएनजी किट और सिलेंडर का उपयोग करें।
-सीएनजी सिलेंडर के स्थान पर एलपीजी, प्रोपेन या कोई अन्य सिलेंडर न लगाएं।
-वाहन-उपकरणों के साथ सीएनजी किट का भी बीमा करवाना उचित है।
-वाहन को हमेशा आग के स्रोत से कम से कम 6 मीटर दूर पार्क करें।
-सीएनजी किट में सिलेंडर वाल्व, मास्टर शट-ऑफ वाल्व और बर्स्ट डिस्क के स्थान और संचालन के बारे में जागरूक रहें।
 

ऐसे करें सुरक्षा जांच
-सुनिश्चित करें कि क्लैम्प्स कसे हुए हों और सिलेंडर सही ढंग से और सुरक्षित रूप से लगा हुआ हो।
-यह देखें कि सिलेंडर वाल्व सुरक्षित है और वाल्व व्हील अपनी जगह पर है।
-सुनिश्चित करें कि गैस टयूबिंग बरकरार है और ठीक काम कर रही है।

सीएनजी किट से गैस लीक होने पर यह करें
-वाहन को स्टार्ट न करें, वाहन को स्टेशन के बाहर खुली हवा में खड़ा करें।
-आस-पास ऐसी सभी गतिविधियां बंद कर दें, जो आग का कारण बन सकती हैं।
-रिसाव को नियंत्रित करने के लिए सीएनजी प्रणाली में सिलेंडर वाल्व-मास्टर शट-ऑफ वाल्व को बंद कर दें।

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अभी देहरादून में प्रमाणित हाइड्रो टेस्टिंग सेंटर नहीं है, हरिद्वार में इसकी टेस्टिंग की जाती है, वहीं से वाहन स्वामी टेस्टिंग कराकर प्रमाण पत्र हासिल करते हैं, जल्द दून में इसके लिए टेस्टिंग सेंटर का इंतजाम किया जाएगा। -सुनील शर्मा, आरटीओ प्रशासन

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