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फसलों को हो रहा नुकसान रोकेगी हाइब्रिड नीम
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 25 Jun 2015 01:09 PM IST
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फसलों को लगातार नुकसान पहुंचा रहे यूरिया के विकल्प के तौर पर बेचे जा रहे नीमयुक्त यूरिया के लिए अब इंडियन फार्मर्स कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफ्को) एफआरआई के वैज्ञानिकों की मदद लेने जा रहा है।
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इसके लिए इफ्को ने वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के साथ करार किया है। इसके तहत अब एफआरआई के वैज्ञानिक ऐसा हाइब्रिड नीम तैयार करेंगे, जो कम समय में ज्यादा पैदावार देगा। इसका उपयोग नीमयुक्त यूरिया बनाने में किया जाएगा। इफ्को की योजना इस नीम को पैदावार बढ़ाने के लिए किसानों तक पहुंचाने की भी है।
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बुधवार को एफआरआई के बोर्ड रूम में इफ्को के निदेशक प्रमोद कुमार सिंह और एफआरआई निदेशक सविता के बीच करार हुआ। इसके तहत 93 लाख रुपए के प्रोजेक्ट में एफआरआई देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार, डॉ. रमाकांत, डॉ. अजय ठाकुर और एएफआरआई जोधपुर के वैज्ञानिक डॉ. प्रवीन चव्हाण और डॉ. यूके तोमर की टीम टिश्यू कल्चर लैब की मदद से हाइब्रिड नीम तैयार करेंगे।
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यह ऐसा नीम होगा जो आम नीम के पेड़ की तुलना में ज्यादा जल्दी तैयार होगा और ज्यादा फल और तेल देगा। प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि इफ्को ने यूरिया के बढ़ते दुष्प्रभावों से किसानों और उनकी जमीनों को बचाने के लिए वर्ष 2011 में नीमयुक्त यूरिया तैयार किया था।
तब से लगातार देशभर में अलग-अलग जगहों से नीमयुक्त यूरिया का उत्पादन किया जा रहा है। बताया कि इसकी डिमांड इतनी है कि उत्तराखंड में जनवरी 2015 से अब तक करीब सात हजार मीट्रिक टन नीमयुक्त यूरिया की खपत हो चुकी है। इसकी लगातार बढ़ती डिमांड और कम उत्पादन के चलते ही इफ्को ने हाइब्रिड नीम तैयार कराने की योजना बनाई है।
इस परियोजना के तहत नीम के तेल का उत्पादन बढ़ाना, नीम का अधिक से अधिक उत्पादन करने, नीम लेपित यूरिया से कृषि में कीड़ों की रोकथाम करने और नीम युक्त यूरिया से फसलों को धीमे और लगातार नाइट्रोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
एफआरआई की निदेशक सविता ने बताया कि उनके वैज्ञानिक टिश्यू कल्चर लैब की मदद से नीम का हाइब्रिड पौधा तैयार करेंगे। इस मौके पर इफ्को की ओर से 21 लाख रुपये का पहला चेक भी एफआरआई निदेशक को दिया गया।
ये होगा बदलाव
इस वक्त 10 से 12 साल में तैयार होने वाले नीम के पेड़ से औसतन 50 किलो फल और 30 किलो बीज मिलता है। इसमें केवल 20 ग्राम सक्रिय तत्व उपलब्ध होते हैं। रिसर्च के बाद पैदा हुए नीम का पेड़ छह से आठ वर्ष में तैयार हो जाएगा, जो फल, बीज और उससे निकलने वाले तेल की मात्रा भी बढ़ा देगा। एफआरआई के वैज्ञानिक इससे पहले हाइब्रिड शीशम का पेड़ तैयार कर चुके हैं।