भू माफिया बेखौफ: वक्फ बोर्ड की करोड़ों की कब्रिस्तान की जमीन बेच डाली, 770 अरब की संपत्ति पर कई कब्जे, 24 को नोटिस
हरिद्वार जिले में कब्रिस्तान की भूमि को बिना अनुमति बेचने का सामने आया है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डा.अहमद इकबाल ने इस मामले में 24 लोगों को नोटिस जारी किया है। भूमि का सर्वे नहीं होने से कई बार अपनी संपत्ति को कब्जा मुक्त कराने में बोर्ड को दिक्कत आ रही है।
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प्रदेश में भू माफिया इतने बेखौफ हैं कि उन्होंने हरिद्वार में राज्य वक्फ बोर्ड की करोड़ों की कब्रिस्तान की जमीन बेच डाली। इस मामले में वक्फ बोर्ड ने 24 लोगों को नोटिस जारी किया है। प्रदेश में हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और देहरादून सहित कई जिलों में वक्फ बोर्ड की करोड़ों रुपये कीमत की जमीन है, लेकिन इसका सर्वे न होने से भूमाफिया जमीन को औनै-पौने दामों में बेच रहे हैं।
ताजा मामला हरिद्वार जिले में कब्रिस्तान की भूमि को बिना अनुमति बेचने का सामने आया है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डा.अहमद इकबाल ने इस मामले में 24 लोगों को नोटिस जारी करते हुए कहा कि हरिद्वार में वक्फ कब्रिस्तान की जमीन का बिना बोर्ड की अनुमति के खरीदा और बेचा गया है।
क्यों न इस संपत्ति की रिकवरी के संबंध में वक्फ अधिनियम 1995 की धारा 52 के तहत कार्रवाई की जाए? बहरहाल इन जिलों से मिली शिकायतों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद जिला प्रशासन के सहयोग से मामले में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
1986 के बाद नहीं हुआ वक्फ बोर्ड की संपत्ति का सर्वे
उत्तराखंड राज्य वक्फ बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक 1986 के बाद से वक्फ बोर्ड की भूमि का सर्वे नहीं हुआ। यही वजह है कि कई बार अपनी संपत्ति को कब्जा मुक्त कराने में दिक्कत पेश आ रही है।
वक्फ बोर्ड की संपत्ति की जीआईएस मैपिंग होनी है। उत्तर प्रदेश से बोर्ड की संपत्ति से संबंधित रिकार्ड मंगाकर देहरादून जिले की मैपिंग की जा चुकी है। इसके बाद अन्य जिलों की मैपिंग कराई जाएगी। -मोहम्मद अली, वक्फ बोर्ड निरीक्षक
उत्तराखंड में वक्फ बोर्ड की है 770 अरब की संपत्ति
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड की पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष रजिया बेग के मुताबिक वर्ष 2009-10 के बोर्ड के एक आंकलन के मुताबिक बोर्ड की राज्य में 770 अरब की संपत्ति है। इनमें कई भवनों और भूखंडों पर अवैध कब्जे हैं। जिन लोगों ने बोर्ड के भवनों को दस और बीस रुपये किराए पर लिया था, वह अब इन भवनों को नहीं छोड़ रहे। कुछ अवैध तरीके से कब्जा किए हुए हैं। यही वजह है कि बोर्ड की इन संपत्तियों से आय न के बराबर है।
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