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सीवरेज पंपिंग स्टेशन के निर्माण से मकानों को खतरा

Tue, 16 Jul 2019 02:09 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jul 2019 02:09 AM IST
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Houses from construction of sewerage pumping station
इसी जगह पर नए सीवर पंपिंग की होनी है खुदाई। - फोटो : RISHIKESH
नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत मायाकुंड में नये सीवरेज पंपिंग स्टेशन के निर्माण कार्य से क्षेत्र के लोगों में आक्रोश है। उनका तर्क है कि नये पंपिंग स्टेशन के निर्माण के लिए जो खुदाई होगी, इसकी चपेट में आकर उनके मकान धंस सकते हैं। लोगों का आरोप है कि नमामि गंगे परियोजना से जुड़े लोग जो सरकारी आवासों में रह रहे हैं उन्हें नोटिस देकर शिफ्ट करने को कहा गया है जबकि स्थानीय लोगों की परवाह तक नहीं है। वहीं, नमामि गंगे के अधिकारियों का कहना है कि पंपिंग स्टेशन का निर्माण वेल सिकिंग मैथर्ड से किया जा रहा है। इसकी चपेट में सरकारी क्वाटर्स के सिवा आसपास का एक भी घर नहीं आ रहा है।
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मायाकुंड में वर्ष 1967 में सीवरेज पंपिंग स्टेशन बनाया गया था, जोकि करीब 40 फीट गहरा है। नमामि गंगे के प्रोजेक्ट मैनेजर संदीप कश्यप ने बताया कि सीवरेज पंपिंग स्टेशन की मियाद अब खत्म हो चुकी है। इसी के चलते सामने ही नया पंपिंग स्टेशन का निर्माण होना है, जिसकी लागत करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा कि इसकी खुदाई उच्च तकनीक (वेल सिकिंग मैथर्ड) के जरिये की जा रही है, जो मुनिकीरेती स्थित सीवर पंपिंग स्टेशन की तर्ज पर होगा। उन्होंने बताया कि इनमें एक्सट्रा रेमेडियल प्रोटेक्शन का उपयोग होगा। इससे खुदाई के दौरान आसपास के मकानों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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उन्होंने बताया कि इसके दायरे में सिर्फ सरकारी क्वाटर्स ही आ रहे है, इसलिए उन्हें नोटिस दिया गया है। प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि पंपिंग स्टेशन का निर्माण जीडीसीएल नामक कंपनी करेगी। संबंधित कॉन्ट्रेक्टर ने पब्लिक कंसलटेंशन मीटिंग कर ली है। इस बैठक में स्थानीय लोगों की ओर से कोई भी शिकायत दर्ज नहीं करवाई गई है।
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यह कहते हैं स्थानीय लोग
मेरे मकान को 50 वर्ष हो चुके हैं। सीवर पंपिंग स्टेेशन के निर्माण से जो खुदाई हो होगी, उससे मेरे मकान के धसकने का खतरा है। जब एक सीवर पंप है तो दूसरे पंप की क्या आवश्यकता है, जबकि 200 मीटर की दूरी पर त्रिवेणी घाट पर एसटीपी प्लांट लगा हुआ है। यदि निर्माण कार्य पर रोक न लगी तो आंदोलन करने को बाध्य होना पड़ेगा।
- अजय गोयल, स्थानीय
घर बने हुए 18 वर्ष हो गए है। पंप के निर्माण स्थल से आठ फीट के दायरे में घर है। इससे घर की नींव पर असर होगा। इस पंप को दुरुस्त करने के बजाए नमामि गंगे के अधिकारी नया पंप बना रहे हैं, जो सरकारी खजाने की फिजुलखर्ची है। किसी भी सूरत में नया पंपिंग स्टेशन बनने नहीं दिया जाएगा, इसका विरोध होगा।
- संजय सिंह, स्थानीय
निर्माण कार्य से मकान धंसने की पूरी उम्मीद है। नमामि गंगे ने सरकारी कर्मचारियों का ख्याल तो रख लिया लेकिन स्थानीय लोगों की परवाह नहीं की। जितनी दूरी पर सरकारी क्वाटर हैं, उतने ही दायरे में मेरा भी घर है। निर्माण कार्य रुकवाने के लिए यदि हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाना पड़ेगा तो स्थानीय लोग इसके लिए तैयार हैं।
- रविन्द्र बहुगुणा, स्थानीय
गंगा से सटा क्षेत्र है। खुदाई होने से मिट्टी दरकेगी। मेरा मकान क्षेत्र का सबसे पुराना है। 50 वर्ष से भी अधिक समय हो गए हैं। इसलिए मेरे मकान के धंसने की ज्यादा संभावना है। साथ ही खुदाई से बीमारियां फैलने का ज्यादा खतरा है। यहां निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा। इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।

- विमला देवी, स्थानीय
पंपिंग स्टेशन आबादी क्षेत्र से दूर बनाया जाना चाहिए। पंपिंग स्टेशन के निर्माण की खुदाई से आसपास पुराने मकानों को खतरा है। स्थानीय लोगों के साथ मिलकर इसके निर्माण नहीं होने दूंगी। फिर चाहे हाईकोर्ट का दरवाजा ही क्यों न खटखटाना पड़े। जब सब लोग विरोध कर रहें तो पंपिंग स्टेशन का निर्माण नहीं किया जाना चाहिए।
- विजय लक्ष्मी शर्मा, पार्षद वार्ड संख्या आठ
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