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हरिद्वार के सबसे बड़े होटल पर गंगा को मैली करने की गाज, सील

Sat, 23 May 2015 10:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Sat, 23 May 2015 10:31 AM IST
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hotel radisson blu of haridwar will be seal.

गंगा एक्शन प्लान पर हरिद्वार में काम शुरू हो गया है। सिडकुल स्थित शहर के सबसे बड़े होटल रेडिसन ब्लू पर शनिवार को सील लगेगी। पर्यावरण मानकों की अनदेखी पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सख्त रवैये के बाद प्रशासन हरकत में आया और होटल बंद कराने का निर्णय लिया गया।

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एनजीटी की ओर से राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को गंगा में गंदगी प्रवाहित करने वाले बड़े आश्रमों और होटलों की जांच कराई गई थी। जांच समिति में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अलावा केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल थे।
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इन्होंने 23 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच में हरिद्वार और ऋषिकेश के बड़े आश्रमों और होटलों की जांच की थी। जांच रिपोर्ट में रेडिसन ब्लू होटल में मानकों का उल्लंघन पाया गया। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से इस होटल को बंद करने के आदेश दिए गए थे लेकिन अभी तक कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा सकी थी।

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शुक्रवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में हुई सुनवाई

hotel radisson blu of haridwar will be seal.

शुक्रवार को एनजीटी में मामले की सुनवाई थी। जिसमें जिलाधिकारी हरिचंद्र सेमवाल ने एनजीटी के सामने प्रशासन का पक्ष रखा। एनजीटी में सोमवार को फिर से मामले की सुनवाई है और जिलाधिकारी को इस मामले में की कार्रवाई के बारे में बताना होगा।  

बोले डीएम
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर शनिवार को होटल रेडिसन ब्लू को बंद करा दिया जाएगा।
-हरिचंद्र सेमवाल, जिलाधिकारी, हरिद्वार

गंगाजल लाने की आड़ में अवैध खनन
घाटों पर पानी लाने की आड़ में सप्तऋषि क्षेत्र में गंगा में जमकर अवैध खनन हो रहा है। गंगा के बीच में जेसीबी और ट्रक उतार दिए गए हैं। इसके बावजूद प्रशासन का कोई अधिकारी मौके पर झांकने को तैयार नहीं है।

दो मई को सीसीआर टावर में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा था कि कुछ संतों ने उनसे सूखे घाटों पर गंगा जल लाने के लिए कहा है। इसके बाद मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को गंगा घाटों तक पानी लाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद प्रशासन की ओर से सप्तऋषि क्षेत्र में गंगा घाटों का मलबा हटाने की अनुमति दी गई थी। लेकिन यह अनुमति ‘खनन का लाइसेंस’ बन गई है।

आश्रम भी बन गए खनन माफिया

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कुछ दिन पहले कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मौके पर जाकर इसका विरोध किया था। तब आश्रम वाले उनके आगे तनकर खड़े हो गए थे।

मातृसदन की ओर से भी घाटों पर पानी लाने के नाम पर हो रहे अवैध खनन का विरोध किया जा चुका है। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती तो यहां तक कह चुके हैं कि पहले माफिया की ओर से खनन किया जाता था लेकिन अब हरिद्वार में आश्रम वाले भी खनन के ठेकेदार बन गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की पता नहीं कौन सी मजबूरी है कि वह मौके पर झांकने तक नहीं गए।

एसडीएम का कहना
आज देहरादून में बैठक के चलते व्यस्त रहा। शनिवार को सप्तऋषि में मौके पर जाकर देखा जाएगा। घाटों पर पानी लाने की आड़ में अवैध खनन नहीं होने दिया जाएगा।
-बीर सिंह बुदियाल, एसडीएम सदर एवं सिटी मजिस्ट्रेट।

शिवानंद का हठयोग, अन्न के बाद जल भी छोड़ा

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गंगा में अवैध खनन के खिलाफ आमरण अनशन पर बैठे मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने शुक्रवार को पानी भी त्याग दिया। उग्र तपस्या करते हुए उन्होंने स्वयं को मातृसदन के ही एक कक्ष में कैद कर लिया है।

बंद नहीं हुआ गंगा में नालों का गिरना
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के निर्देश पर राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एनआईएच) रुड़की के वैज्ञानिकों की 12 टीमों ने गंगा की स्वच्छता के मद्देनजर श्रीनगर से हरिद्वार तक विभिन्न कार्यों का निरीक्षण किया।

रिपोर्ट के अनुसार गंगा में गिर रहे नालों की स्थिति भी जस की तस बनी हुई है और विगत छह माह में गंगा की स्वच्छता की दिशा में कोई खास काम नहीं हो पाया है। जल्द ही यह रिपोर्ट मंत्रालय को भेजी जाएगी।

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