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अदालत के नए आदेश के बाद बंद होंगे इस नियम का पालन न करने वाले अस्पताल और क्लीनिक

Sat, 25 Aug 2018 08:44 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Updated Sat, 25 Aug 2018 08:44 AM IST
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Hospitals and clinics not following this rule will close
- फोटो : demo

नैनीताल हाईकोर्ट ने इस नियम का पालन न करने वाले अस्पतालों और क्लीनिकों को तत्काल प्रभाव से सील करने का आदेश दिया है। 

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उत्तराखंड में बगैर लाइसेंस तथा क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रीकरण एवं विनियमन) अधिनियम- 2010 के तहत गैरपंजीकृत सभी अस्पतालों और क्लीनिकों को तत्काल प्रभाव से सील करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों और अधिनियम में पंजीकृत सभी क्लीनिकों के डॉक्टरों को भी आदेश दिया है कि वे केवल जेनेरिक दवाएं लिखें और रोगियों पर ब्रांडेड दवाओं को खरीदने के लिए दबाव न बनाएं।

बाजपुर निवासी अहमद नबी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने प्रावधानों को चिकित्सालयों में लागू नहीं करने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने निर्देश दिए कि अस्पतालों और क्लीनिकों के संचालन के लिए मौजूदा प्रावधानों और कानून का सख्ती से पालन किया जाए।

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मरीजों की अनावश्यक जांच न करवाएं!

Hospitals and clinics not following this rule will close

अदालत ने यह भी कहा कि सरकार निजी एवं सरकारी अस्पतालों में विभिन्न मेडिकल जांचों और परीक्षणों का शुल्क भी एक माह के भीतर तय करे।

कोर्ट ने सभी चिकित्सालयों को आदेश दिया कि वे मरीजों की अनावश्यक जांच न करवाएं। कोर्ट ने कहा कि चिकित्सालयों में आईसीयू की एक दीवार शीशे से निर्मित की जाए जिससे मरीज के परिजन उसे देख सकें। कोर्ट ने कहा कि चिकित्सालय हर 12 घंटे में परिजनों को मरीज के स्वास्थ्य की जानकारी भी दें।

यह थी याचिका
बाजपुर निवासी अहमद नबी ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि बाजपुर में दोराहा स्थित बीडी अस्पताल तथा पब्लिक अस्पताल केलाखेड़ा बगैर पंजीकरण के चल रहे हैं। मार्च 2016 में सीएमओ ने इन्हें नोटिस भी भेजा था। 

कोर्ट भी हैरान हुआ

Hospitals and clinics not following this rule will close
नैनीताल उच्च न्यायालय - फोटो : file photo

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि इन चिकित्सालयों में सर्जरी के लिए मरीज तो भर्ती पाए गए, लेकिन वहां एक भी डॉक्टर एमबीबीएस तथा सर्जरी करने की अधिकृत डिग्री वाला नहीं था।

इनमें केवल होम्योपैथिक व यूनानी चिकित्सा डिग्रीधारी डाक्टर हैं, जो ऑपरेशन करने के लिए अधिकृत नहीं हैं। कोर्ट ने पाया कि मई 2018 में सीएमओ ने ऐसे चिकित्सालयों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए थे, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। 

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने पंजीकरण आदेश स्थगित करने को कहा था
सरकार ने कोर्ट को बताया कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने एक प्रत्यावेदन देकर कहा था कि क्लीनिकल एस्टेबलिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एंड रेग्यूलेशंस) एक्ट 2010 के तहत पंजीकरण कराने से चिकित्सालयों में इलाज कराने का खर्चा पांच गुना तक बढ़ जाएगा। आईएमए ने इस आधार पर अनुरोध किया था कि पंजीकरण कराने का आदेश स्थगित कर दिया जाए। इस पर डीएम नैनीताल ने सचिव चिकित्सा से लाइसेंस बनाना पेंडिंग रखने को कहा था।

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