उत्तराखंड: पहाड़ों पर 'मरने' को छोड़ दिए लोग!
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उत्तराखंड के पहाड़ के अस्पतालों में यदि डॉक्टर जाएं भी तो क्या करेंगे? हाल यह है कि वहां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और स्वास्थ्य उपकेंद्रों में से कई में न तो पानी की व्यवस्था है और न ही ऑपरेशन थियेटर और उपकरण हैं।
यही नहीं अस्पतालों में मूलभूत सुविधाएं जैसे बिजली, शौचालय, प्रतीक्षालय आदि भी अपर्याप्त हैं। यह खुलासा कैग की ऑडिट रिपोर्ट से हुआ है। चिकित्सकों की कमी का हवाला देकर स्वास्थ्य सेवाओं की खामियां छुपाने वाली राज्य सरकार की पोल कैग की ऑडिट रिपोर्ट ने खोली है।
कैग रिपोर्ट के अनुसार पहाड़ों पर 30 फीसदी पीएचसी में आवासीय सुविधा नहीं है, ऐसे में चिकित्सक रहेंगे तो कहां। 50 फीसदी स्वास्थ्य उपकेंद्रों में बिजली के कनेक्शन तक नहीं लगे हैं। यही नहीं 38 फीसदी स्वास्थ्य उपकेंद्रों और 10 फीसदी पीएचसी में जल आपूर्ति नहीं है।
धूल फांक रहे हैं अस्पतालों के स्टोर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में या तो शल्य कक्ष नहीं हैं, जिनमें कक्ष हैं उनमें उपकरण नहीं हैं। कहीं करोड़ों के उपकरण अस्पतालों के स्टोर में धूल फांक रहे हैं।
कैग के अनुसार 2006 से 2012 के बीच अस्पतालों के लिए 2.18 करोड़ के 142 उपकरण खरीदे गए, जिसमें एक्सरे मशीन, बेवी वार्मर, हीट वार्मर जैसे उपकरण हैं। ये उपकरण आज भी स्टोर में पड़े हैं।
ऑपरेशन थियेटर हैं, उपकरण नहीं
सीएचसी में विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं के लिए ऑपरेशन थियेटर का होना अनिवार्य है, जिसमें 14 मुख्य उपकरण होने चाहिए।
कैग ने 10 सीएचसी का निरीक्षण किया, जिसमें चार में ऑपरेशन थियेटर ही नहीं थे, जबकि छह थराली, भिकियासैण, घंडियाल, भगवानपुर, किच्छा और बाजपुर में ऑपरेशन थियेटर तो थे पर उपकरण नहीं थे।
60 फीसदी अस्पतालों में लैब नहीं
कैग के अनुसार 60 फीसदी पीएचसी और सीएचसी में लैब तक नहीं हैं। हाल यह है कि लैब नहीं होने के कारण रक्त जांच, मल-मूत्र जांच, थक्काकरण अवधि, यौन संचारित रोगों का परीक्षा, क्षय रोग के बलगम परीक्षण, मलेरिया की जांच की प्रभावित हो रही है।
कार्मिकों की तैनाती पर सवाल
कैग ने मैदानों में अधिक जबकि जरूरतमंद पहाड़ी क्षेत्रों में चिकित्सक और अन्य स्टाफ के अधिक पद रिक्त होने पर सवाल खड़ा किया है।
रिपोर्ट के अनुसार अल्मोड़ा, पौड़ी और चमोली जिले में चिकित्सक वर्ग एक के 43 फीसदी पद रिक्त और चिकित्सक वर्ग दो के 65 फीसदी पद रिक्त पाए।
मैदानी जिलों हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में वर्ग एक में 31 फीसदी रिक्तियां और वर्ग दो में 44 फीसदी रिक्तियां मिली। तकनीशियनों और फार्मासिस्टों की तैनाती में पहाड़ में 33 फीसदी पद रिक्त जबकि मैदानों में आठ फीसदी ही रिक्त है।