{"_id":"66355fa0005735d21809a6c4","slug":"hope-of-opening-of-ice-skating-rink-arose-after-13-years-dehradun-news-c-5-drn1005-404705-2024-05-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: 13 साल बाद जगी आइस स्केटिंग रिंक खुलने की उम्मीद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: 13 साल बाद जगी आइस स्केटिंग रिंक खुलने की उम्मीद
विज्ञापन
बीते 13 साल से बदहाल पड़े साउथ-ईस्टर्न एशिया के एकमात्र आइस स्केटिंग रिंक के खुलने की उम्मीद जगी है। महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज, रायपुर में बने देश के इस एकमात्र इंडोर रिंक का जिम्मा अब सरकार ने अपने पास ले लिया है। इससे पहले एक निजी कंपनी इसका संचालन कर रही थी।
दरअसल साल 2011 में साउथ-ईस्टर्न एशियन विंटर गेम्स के लिए 80 करोड़ रुपये की लागत से इस आइस स्केटिंग रिंक को बनाया गया था। इस प्रतियोगिता में भारत के अलावा पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, मालदीव, श्रीलंका ने हिस्सा लिया था। सिर्फ एक आयोजन के बाद यहां न कोई प्रतियोगिता हुई और न ही यहां कोई खिलाड़ी अभ्यास करता है। ऐसे में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए बने इस रिंक का लाभ खिलाड़ियों को नहीं मिल पा रहा था।
आइस स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष शिव पैन्यूली ने कहा, इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि विश्वस्तरीय रिंक होने के बावजूद प्रदेश के खिलाड़ी दूसरे राज्यों में जाकर अभ्यास कर रहे हैं। ऐसे में सरकार की ओर से इसके संचालन की जिम्मेदारी लिए जाने से एक बार फिर खिलाड़ियों में रिंक के खुलने की उम्मीद जगी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
दरअसल साल 2011 में साउथ-ईस्टर्न एशियन विंटर गेम्स के लिए 80 करोड़ रुपये की लागत से इस आइस स्केटिंग रिंक को बनाया गया था। इस प्रतियोगिता में भारत के अलावा पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, मालदीव, श्रीलंका ने हिस्सा लिया था। सिर्फ एक आयोजन के बाद यहां न कोई प्रतियोगिता हुई और न ही यहां कोई खिलाड़ी अभ्यास करता है। ऐसे में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए बने इस रिंक का लाभ खिलाड़ियों को नहीं मिल पा रहा था।
विज्ञापन
आइस स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष शिव पैन्यूली ने कहा, इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि विश्वस्तरीय रिंक होने के बावजूद प्रदेश के खिलाड़ी दूसरे राज्यों में जाकर अभ्यास कर रहे हैं। ऐसे में सरकार की ओर से इसके संचालन की जिम्मेदारी लिए जाने से एक बार फिर खिलाड़ियों में रिंक के खुलने की उम्मीद जगी है।
विज्ञापन