फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Honorary captain Madho Singh passed away in 101 Age 

101 साल की उम्र में वीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर माधो सिंह का निधन, पाकिस्तान को चटाई थी धूल

Wed, 03 Apr 2019 10:52 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हल्द्वानी/रामनगर
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हल्द्वानी/रामनगर Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 03 Apr 2019 10:52 PM IST
विज्ञापन
Honorary captain Madho Singh passed away in 101 Age 
ऑनरेरी कैप्टन (सूबेदार मेजर) माधो सिंह - फोटो : अमर उजाला

वयोवृद्ध गौरव सेनानी ऑनरेरी कैप्टन (सूबेदार मेजर) माधो सिंह का 101 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने बरेली के श्रीराम मूर्ति अस्पताल में मंगलवार देर रात अंतिम सांस ली। 1947-48 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में वीरता और साहस का परिचय देने पर उन्हें वीर चक्र से नवाजा गया था। दोपहर बाद रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।

विज्ञापन

 
बागेश्वर जिले के अमस्यारी कोट के मूल निवासी कैप्टन माधो सिंह 1968 में सेना से रिटायर होने के बाद हल्द्वानी के हरिपुर नायक कुसुमखेड़ा में बस गए। बड़े बेटे पावर कारपोरेशन से रिटायर रंजीत सिंह बिष्ट ने बताया कि मंगलवार को उनकी तबियत खराब हो गई। 
विज्ञापन


भोटिया पड़ाव स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में ले जाने पर डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद उन्हें बरेली के श्रीराम मूर्ति अस्पताल ले गए। उनका ब्लड प्रेशर काफी कम हो गया था। मंगलवार देर रात साढ़े तीन बजे उनका निधन हो गया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

ताऊ के साथ लड़ी थी पाकिस्तान के खिलाफ जंग

वयोवृद्ध गौरव सेनानी ऑनरेरी कैप्टन (सूबेदार मेजर) माधो सिंह का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह हल्द्वानी स्थित उनके आवास लाया गया। यहां सेना के जवानों ने पुष्प चक्र अर्पित किए। इसके बाद पूरे सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

मेजर बीएस रौतेला ने बताया कि 20 फरवरी को कैप्टन माधो सिंह का 101वां जन्मदिन मनाया गया था। वहीं, माधो सिंह के बेटे रंजीत सिंह ने बताया कि उनके तीन अन्य छोटे भाई वीरेंद्र सिंह बिष्ट, गजेंद्र सिंह बिष्ट और भूपेंद्र सिंह बिष्ट के अलावा दो बहनें हैं। 

माधो सिंह ने अपने ताऊ धन सिंह के साथ पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। युद्ध के दौरान ताऊ वीरगति को प्राप्त हो गए। मेजर (रि.) बीएस रौतेला के अनुसार माधो सिंह हैदराबाद रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। जब पैरा बटालियन का गठन हुआ तो वे पैरा कुमाऊं में शामिल हुए। आजादी के तुरंत बाद कश्मीर में पाकिस्तानी घुस आए। 

उन्हें खदेड़ने के लिए ऑपरेशन चलाया गया। माधो सिंह की पल्टन पुंछ क्षेत्र में तैनात थी। माधो सिंह के साथ उनके  ताऊ धन सिंह भी थे। युद्ध के मैदान में दोनों जांबाजों ने अदम्य साहस का परिचय दिया लेकिन धन सिंह मातृ भूमि की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। युद्ध समाप्ति के बाद दोनों को वीर चक्र से अलंकृत किया गया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed