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अब देसी पद्धति हाइब्रिड से बनेंगे राष्ट्रीय राजमार्ग

Sun, 29 May 2016 12:54 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 29 May 2016 12:54 PM IST
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homegrown system hybrid will make national highway
national highway - फोटो : file photo

राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में फ्रांस, जर्मनी और यूरोपीय देशों की डीबीटीएल (डिजाइन, बिल्ट आपरेट ट्रांसफर) पद्धति फेल होने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अब अपनी नई विकसित हाइब्रिड पद्धति से राजमार्गों का निर्माण कराएगा।

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पहली बार उत्तराखंड के दो राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण इस पद्धति से फाइनल कर दिया गया है। प्रदेश के अलावा दक्षिण भारत के कुछ प्रांतों में भी इस पद्धति से राष्ट्रीय राजमार्ग स्वीकृत किए गए हैं। डीबीओटी पद्धति से हो रहे निर्माण कार्यों को ऋण देने से बिदक रहे बैंक भी हाईब्रिड पर ऋण देने को राजी हैं।
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अटल सरकार में स्वर्णिम चतुर्भुज योजना पास होने के बाद विदेशी डीबीटीएल पद्धति केंद्र सरकार को सुझाई गई थी। इस पद्धति में सारा धन डेवलपर कंपनी लगाती है और बाद में टोल टैक्स के रूप में वसूली करती है, लेकिन यह पद्धति फेल हो गई। जहां भी यह पद्धति लागू हुई काम अटक गया। इस पद्धति से देहरादून-हरिद्वार और मुजफ्फरनगर हरिद्वार राजमार्ग बन रहे थे, जो अटके हुए हैं। देश के अन्य हिस्सों में भी इस पद्धति का यही हाल हुआ है।
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इस पद्धति को फेल करने में कंपनियों ने भी गलती की। कंपनियों ने ऋण राष्ट्रीय राजमार्गों के नाम से लिया और पैसा किसी और धंधे में लगा दिया। वह धंधा फेल होने से राष्ट्रीय राजमार्ग का काम अटक गया और योजना की लागत बढ़ गई। निर्माण एजेंसियां भी डिफाल्टर घोषित हो गईं।

देश के बैंकों ने इस पद्धति से होने वाले किसी भी कार्य के लिए ऋण देने से मना कर दिया। इसके बाद प्राधिकरण ने हाईब्रिड पद्धति तैयार की। छह माह पहले इसे हरी झंडी दे दी गई। पहली बार उत्तराखंड में रुड़की के 1818 करोड़ के दो राष्ट्रीय राजमार्गों को इस पद्धति से बनाए जाने का निर्णय लिया गया है। हाईब्रिड पद्धति से होने वाले निर्माण कार्यों को ऋण देने से देश के बैंक भी तैयार हो गए हैं।

हाईब्रिड पद्धति की खूबी यह है कि इसमें डेवलपर का रिस्क कम हो जाता है। बैंक भी ऋण देने में इत्मिनान महसूस कर रहे हैं। टोल टैक्स सरकार लेगी और एक निश्चित धनराशि हर साल डेवलपर को देगी। डेवलपर और बैंक का रिस्क काफी कम हो जाएगा।

- प्रदीप सिंह गुसाईं, डीजीएम (टेक्निकल), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग

उत्तराखंड के दो राष्ट्रीय राजमार्ग
- रुड़की, छुटमलपुर-गागलहेड़ी
- गागलहेड़ी से यमुनानगर

दोनों की कुल लंबाई -105 किमी
कुल बजट - 1818 करोड़

इसे कहते हैं हाईब्रिड
हाईब्रिड पद्धति को इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट कॉंटेक्ट और डीबीओटी को मिश्रित कर बनाया गया है। इसमें डीबीओटी की तरह कंपनी पूरा पैसा नहीं लगाती। इसमें 40 फीसदी पैसा सरकार लगाएगी और 60 फीसदी डेवलपर कंपनी। बाद में कंपनी को टोल टैक्स से पैसा लौटाया जाएगा।

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