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समान काम, समान वेतन को लेकर होमगॉर्ड पहुंचे हाइकोर्ट

Sun, 22 Jan 2017 02:16 PM IST
राकेश शर्मा/अमर उजाला, देहरादून
राकेश शर्मा/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 22 Jan 2017 02:16 PM IST
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home guard appeal in high court for same salary.
नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : PTI

पुलिस महकमे के कांस्टेबल की तरहसमान कार्य और समान मानदेया की वकालत करते हुए होमगार्डों ने नैनीताल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ता ने चंडीगढ़ में होमगार्ड के मानदेय को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बनाया है। हाईकोर्ट ने याचिका का संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

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याचिका में कहा गया है कि सिपाही की तरह उन्हें भी 700 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय मिलना चाहिए। राज्य में होमगार्ड को अभी रोजमर्रा 400 रुपये का मानदेय मिलता है।
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उत्तराखंड में होमगार्ड की संख्या छह हजार चार सौ के करीब है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने होमगार्ड दिवस पर मानदेय में 100 रुपये की बढ़ोतरी करने के साथ होमगार्ड की संख्या दस हजार तक पहुंचाने की घोषणा की थी। पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश के होमगार्ड लंबे समय पुलिस कांस्टेबल के समान मानदेय दिए जाने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे है।

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SC के फैसले के आधार पर हाईकोर्ट की शरण में

home guard appeal in high court for same salary.
Supreme Court - फोटो : Getty Images

चंडीगढ़ हाईकोर्ट से खिलाफ फैसला आने के बाद होमगार्डों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा था कि यदि समान कार्य है तो होमगार्डों को समान वेतन ही मिलना चाहिए।

उच्चतम न्यायालय के इसी आदेश को आधार बनाकर प्रदेश के होमगार्ड भी नैनीताल हाईकोर्ट की शरण में पहुंच गए है। हाईकोर्ट ने याचिका का संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से छह सप्ताह में जवाब मांगा है।

पुलिस महकमे में भर्ती होने वाले सिपाही को करीब 21 हजार रुपये का वेतन मिलता है। उसी हिसाब से होमगार्ड भी 700 रुपये प्रतिदिन का मानदेय चाहते हैं।  

दोनों के कार्य में नहीं समानता

home guard appeal in high court for same salary.

पुलिस अफसरों की माने तो सिपाही और होमगार्ड के कार्य में कोई समानता नहीं है। होमगार्ड में भर्ती की योग्यता आठवीं पास है। न तो उनकी किसी तरह की लिखित परीक्षा होती है और न ही ट्रेनिंग।

कांस्टेबल पद पर भर्ती के लिए इंटर पास होने के साथ शारीरिक, लिखित परीक्षा और मेडिकल टेस्ट पास करना होता है। बाकायदा उनकी नौ माह की ट्रेनिंग भी होती है। होमगार्ड की ड्यूटी आठ घंटे की होती है, जबकि सिपाही की ड्यूटी का समय निर्धारित नहीं है।
 
होमगार्ड की याचिका पर हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करने की तैयारी चल रही है। सिपाही और होमगार्ड का क्या कार्य है, उसका पूरा ब्यौरा तैयार किया गया है। तथ्य परक हलफनामा हाईकोर्ट में दाखिल किया जाएगा, ताकि पूरी स्थिति साफ हो सके। 
-अशोक कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक प्रशासन

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