इस होली आपको मखमली एहसास कराएगा ये गुलाल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुलाल हर्बल होने के साथ ही अगर मखमली एहसास देने वाला हो और खुशबू भी तो हो होली का मजा दोगुना हो जाएगा।
इस बार वेलवेट गुलाल बाजार में आया है, जो सादे गुलाल से कुछ महंगा है लेकिन आंखों और बालों के लिए सुरक्षित है। इसी तरह से स्नो स्प्रे भी नया है जो आपकी त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचाएगा।
यही नहीं आप खरीद सकते हैं अरारोट का बना गुलाल। जो मुंह के भीतर भी चला जाए तो दिक्कत नहीं होगी। हनुमान चौक स्थित गोयल पूजा स्टोर के तरुण गोयल बताते हैं कि वेलवेट कलर छूने में वेलवेट जैसा मुलायम है।
इसकी खुशबू हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। यह कलर्स स्पेशल ऑर्डर पर तैयार कराते हैं। यह पूरी तरह से हर्बल होते हैं। तरुण ने बताया कि गीले कलर्स में हर कोई पक्का कलर चाहता है। अरारोट के कलर की काफी बिक्री हो रही है।
पिचकारी में एंग्री बर्ड और भीम
इस बार पिचकारी भी कार्टून करेक्टर सहित मोबाइल गेम के नाम से बिक रही है। अपनी पसंद के किरदार देख बच्चे इसे खूब पसंद कर रहे हैं।
इनमें एंग्री बर्ड सहित छोटा भीम, एंग्री भीम, नोटी भीम, हच वाला जोजो आदि पिचकारियां हैं। साथ ही चंद्रकांता, टीपू सुल्तान पिचकारी, टैंक वाली पिचकारी भी खरीदी जा रही है।
रंगों की कीमत
वेलवेट कलर- 30 रुपए का सौ ग्राम
अरारोट कलर- 10 रुपए का सौ ग्राम
सेल खड़ी कलर (सामान्य)- 4 रुपए का सौ ग्राम
पौने नौ बजे बाद शुभ मुहूर्त
रविवार (16 मार्च) को उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र और कन्या राशि में स्थित चंद्रमा होने पर रात्रि प्रदोष काल 6 बजकर 22 मिनट के बाद ही होलिका दहन सही रहेगा। इसका शुभ समय 7 बजकर 52 मिनट तक है।
आचार्य भरत राम तिवारी ने बताया कि 16 मार्च को सुबह 9 बजकर 45 मिनट तक भद्रा रहेगी। इसके पश्चात ही होलिका पूजन किया जाना शुभ होगा।
हनुमान तथा भैरव जी की पूजा कर खिलौने-तलवार, कच्चा नारियल, गुलाल-फूल आदि अर्पण कर परिवार के साथ होलिका की तीन बार परिक्रमा करनी चाहिए।
आचार्य सुशांत राज ने बताया कि जो लोग शाम को होलिका दहन नहीं कर सकते। वे एक बजकर आठ मिनट से 3 बजकर 16 मिनट के मध्य होलिका दहन कर सकते हैं, यह समय भी शुभ है।
केमिकल न करें होली के बदरंग, रहें दूर
होली खेलते हुए हर्बल रंगों का प्रयोग करें। केमिकलयुक्त रंगों से दूर रहें। यह ताकीद आम है, लेकिन अगर आप शहर में रंगों में केमिकल की मिलावट की जांच करने चलेंगे तो निराश हो जाएंगे।
यहां इस तरह की जांच की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। गैर-सरकारी स्तर पर चल रही संस्थाओं की लैब छोड़ दें तो अन्य किसी स्तर पर इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया।
रंग और उसमें मिलाए जाने वाले तत्व
रंग - तत्व - असर
काला-लैड आक्साइड- किडनी पर असर
हरा-कापर सल्फेट- आंख की एलर्जी, अंधता
बैंगनी-क्रोमियम आयोडाइज्ड- अस्थमा, एलर्जी
सिल्वर-एल्युमिनियम ब्रोमाइड- त्वचा एलर्जी
अगर आप चाहते हैं तो यहां कराएं जांच
अगर आप रंगों में केमिकल की जांच कराना चाहते हैं तो सोसायटी आफ पाल्यूशन एंड एनवायरनमेंटल कंजरवेशन साइंटिस्ट्स (स्पैक्स) संस्था के माध्यम से करा सकते हैं।
संस्था की लैब मिलावटी खाद्य पदार्थों समेत जल गुणवत्ता की जांच भी करती है। संस्था के सचिव बृजमोहन शर्मा से उनके मोबाइल नंबर-9411719465 पर संपर्क किया जा सकता है।
यूं बना सकते हैं फूलों, हल्दी, मेहंदी से रंग
पीला रंग : यह रंग पाने के लिए गेंदा के फूलों को उबालें और रात भर सूखने दें। हल्दी को पीले रंग के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है। मात्रा बढ़ाने के लिए इसमें बेसन या मकई का आटा मिलाया जा सकता है।
लाल रंग : यह रंग हासिल करने के लिए टेसू के फूलों को उबालकर रात भर सूखने दें। इस रंग के लिए सेमल के फूलों का भी प्रयोग कर सकते हैं। प्याज की 10-15 पत्तियों को आधा लीटर पानी में उबालकर ठंडा करने के बाद रंग के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
हरा रंग : यह रंग पाने के लिए मेहंदी काम आ सकती है। इसमें इतनी ही मात्रा में आटा मिलाकर प्रयोग कर सकते हैं। गुलमोहर की पत्तियां भी इसमें शामिल कर सकते हैं।
चंदन पाउडर को सूखे और भीगे दोनों रूपों में प्रयोग किया जा सकता है। इसकी मात्रा बढ़ाने के लिए इसमें आटे को प्रयोग कर सकते हैं।
आओ इस होली को एक नया रंग दें
पाठकों। होली करीब है। यह रंगारंग उत्सव क्या छोटे-क्या बड़े, क्या गरीब-क्या अमीर-सभी के तन-मन रंग देता है। उल्लास के इस मौके पर आइए सभी संकल्प लें कि इस होली को कुछ अलग तरह से मनाएं-थोड़ी सावधानी अपनाते हुए।
चाहे रंग हों या खान-पान, हमारी सजगता हमारी होली शुभ और सुरक्षित करेगी। इस उद्देश्य को अपनाते हुए अमर उजाला होली तक आपके साथ अपने इस अभियान को चलाएगा। आपके सुझावों का स्वागत है।
फोन- 9675201319, 9675201320