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एचएनबी विवि वेबीनार: 14 दिन क्वारंटीन की शर्त पर ही चार धाम यात्रा की इजाजत देने की पैरवी

Sat, 27 Jun 2020 06:43 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर(पौड़ी)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर(पौड़ी) Published by: अलका त्यागी Updated Sat, 27 Jun 2020 06:43 PM IST
सार

  • ‘सूक्ष्म जैविकीय विविधता : स्वास्थ्य से पर्यावरण तक’ विषय पर वेबिनार

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HNB University Webinar: Lobbying to allow Char Dham Yatra on condition of 14 days quarantine
- फोटो : चारधाम यात्रा

विस्तार

एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय के वनस्पति एवं सूक्ष्म जैविकी विभाग और एएमआई (भारतीय सूक्ष्म वैज्ञानिक संघ) ने शनिवार को ‘सूक्ष्म जैविकीय विविधता : स्वास्थ्य से पर्यावरण तक’ विषय पर अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया। इस दौरान चार धाम यात्रा से पहले और बाद में 14-14 दिन क्वारंटीन की शर्त पर ही चार धाम यात्रा इजाजत दिए जाने की पैरवी की गई।

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वेबिनार के मुख्य वक्ता मुख्य वक्ता बनारस हिंदू विवि के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के पूर्व निदेशक प्रो. टीएम महापात्रा ने प्रतिभागियों की ओर से उत्तराखंड चार धाम यात्रा शुरू किए जाने और यात्रा के दौरान बरती जाने वाली सुविधाओं पर उनसे सवाल किया था।
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प्रो. महापात्रा ने कोविड-19 की पहचान के बारे में बताया। कहा कि लगभग 5 माह बाद भी कोविड वायरस संक्रमण की सटीक पहचान करने के लिए कोई सौ फीसदी विश्वसनीय तरीका नहीं है।
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उन्होंने रियल टाइम पीसीआर मशीन, रैपिड एंटीजन टेस्टिंग, ईजीएस और एलाइजा आदि की कमियों पर रोशनी डाली। वीबीआरआई रिसर्च ग्रुप स्वीडन के डॉ. अंशुमान मिश्रा ने सार्स कोविड वायरस की आनुवंशिक विविधता और उसकी रोग जनन प्रक्रिया के बारे में बताया। कहा कि वायरस के सात आनुवंशिक प्रतिरूप हैं, जिससे दुनिया के अलग-अलग देशो में इस वायरस से होने वाली मौतों और उनके रिकवरी रेट में अंतर है।


बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विवि  के डॉ. जय शंकर सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक अभी तक पूरे संसार की सूक्ष्म जैवीय विविधता का केवल दो फीसदी ही  अध्ययन कर पाए हैं। रॉयल नीदरलैंड समुद्र अनुसंधान संस्थान के डॉ. सुभाष यादव ने समुद्र की  सूक्ष्म जैविक विविधता पर हुए शोध की जानकारी दी। अध्ययन के लिए सैंपल लेने की विधियों। कल्चर मीडिया और उनके पहचान के लिए प्रयोग होने वाली विभिन्न विधियों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर प्रो. पीसी लखेड़ा, डॉ.  मनीषा निगम, प्रो. राजेश शर्मा, डॉ. आशा, प्रो. एन सिंह, डॉ.  विनीत कुमार मौर्य, राहुल कुंवर आदि ने विचार रखे। 

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