फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   his shirt button open last 55 year

55 सालों से नहीं लगाए कमीज के बटन

Thu, 13 Mar 2014 01:51 AM IST
कन्नू रूबाली/अमर उजाला, चोरगलिया
कन्नू रूबाली/अमर उजाला, चोरगलिया Updated Thu, 13 Mar 2014 01:51 AM IST
विज्ञापन
his shirt button open last 55 year

उत्तराखंड के इन ‘फकीर’ की दास्तान पढ़कर भले ही आपको अजब-गजब लगे, पर उन्होंने अपनी पहचान कायम रखने के लिए फक्कड़ की तरह 55 साल से कमीज के बटन नहीं लगाए।

विज्ञापन


पढ़ें, प्रेमी संग मिल पत्नी ने कर डाला पति का खून
विज्ञापन


स्कूल में थे, तब मास्साब की मार खाई। घर के अंदर और बाहर बटन खुले रहने पर समाज में पागल, टपोरी और लफंडर भी सुनने को मिला। फिर भी 65 वर्ष के फकीर सिंह अपने नाम को सार्थक बनाने के लिए फक्कड़पन की जिंदादिली के साथ आज भी वैसे ही रहते हैं, जैसे 55 साल पहले थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


10 साल की उम्र में खोल दिए बटन
मल्ला पचौनिया गांव में रहने वाले फकीर सिंह ने 10 साल की उम्र में अपने नाम की तरह ही खुद को फकीर बनाने के लिए कमीज के बटन खोले।

पढ़ें, बीजेपी में बगावत, उत्तराखंड में पूर्व मंत्री का इस्तीफा

अजीब इत्तफाक है कि उन्होंने राम सिंह बनकर जिया और जुनून ऐसा चढ़ा कि जिंदगी के तमाम झंझावातों को झेलने के बावजूद 65 की उम्र तक इस वेश को नहीं बदला।

पिता का नाम है धन सिंह
यह रोचक है कि फकीर के दादा का नाम दौलत सिंह और पिता का धन सिंह था। जन्म से पूर्व फकीर के चार बड़े भाई थे, जो अल्प आयु में मर गए। फकीर का जन्म हुआ तो पिता धन सिंह ने उसका नाम राम सिंह रखा। तभी एक माह बाद धन सिंह के घर एक फकीर बाबा आए।

पढ़ें, हां, मैं मानता हूं मुझसे गलती हुई: हरीश रावत


उन्हें चार बड़े बेटों की अल्प मृत्यु की कहानी बताई और राम सिंह का नाम बदल कर फकीर सिंह रखने को कहा। पिता ने बाबा की इस बात के बाद राम का नाम ही नहीं बदला, बल्कि दशरथ की तरह अपने इस राम को फकीर की तरह बनने की भी आज्ञा दी। तब फकीर 10 साल के थे।

पढ़ें, ...तो एनडी तिवारी लड़ेंगे सपा से चुनाव!

उन्होंने बहुत सोचा कि फकीर का वेश कैसे धरूं। फिर दिमाग में कमीज के सारे बटन खुले रखने का ख्याल आया और तब से फकीर हमेशा कमीज को बाकी कपड़ों के बाहर से पहनकर उसके बटन खुले रखते हैं।

स्कूल भी जाते थे खुली शर्ट में
8वीं तक पढ़ाई की और वह भी रोज मास्साब की मार खाकर। क्योंकि स्कूल की कमीज भी ऐसे ही पहनते थे। उनके घर में कोई भी शुभ काम हुआ हो या फिर उनके गांव में। फकीर का फक्कड़पन खत्म नहीं हुआ।

पढ़ें, बिगड़ैल मौसम ने बढ़ाई पहाड़ की मुश्किल

20 साल उन्होंने टैक्सी चलाई और देश के तमाम हिस्सों में इसी अंदाज में घूमे। फकीर सिंह के आज 3 बेटे और 1 बेटी है।

जब तक जियूंगा नाम के लिए जियूंगा
चोरगलिया जोगानाला क्षेत्र में जनरल स्टोर चलाने वाले फकीर का कहना है कि समाज ने मुझे इस वेश में जाने क्या-क्या ताने नहीं दिए। वो कहते हैं कि जब तक जिंदा हूं अपने नाम के लिए जियूंगा, क्योंकि नाम के साथ पहचान बनाने का आनंद ही कुछ और है।

पढ़ें, होली महोत्सव में दिखा सीएम हरीश का अलग रंग

समाज में मेरी पहचान इसलिए ही नहीं कि मैं धन सिंह का बेटा फकीर सिंह हूं। बल्कि इसलिए भी, क्योंकि मैंने 55 साल से कमीज के बटन नहीं लगाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed