हिंदू-मुस्लिम परिवार ने पेश की मिसाल, एक दूसरे के बेटों को किडनी देकर निभाया इंसानियत का फर्ज
- हिंदू और मुस्लिम परिवार ने हिमालयन अस्पताल में भर्ती एक-दूसरे के बेटे को दी किडनी
- अपने परिजनों से मैच नहीं हो पाया था दोनों युवकों का ब्लड ग्रुप
विस्तार
मजहब के नाम पर नफरत फैलाने वाले लोगों को विकांशू और आश मोहम्मद से सीख लेनी चाहिए। दोनों के धर्म जुदा हैं, लेकिन उन्हें नया जीवन एक-दूसरे के परिवार की वजह से ही मिला। दरअसल दोनों की किडनियां खराब हो गई थीं।
परिवार वालों से ब्लड ग्रुप नहीं मिलने के कारण परिजन अपने बेटों को खुद किडनी नहीं दे सकते थे। कुदरत का करिश्मा देखिए आखिर विकांशू और आश का खून एक-दूसरे के परिजनों से मेल खा गया।
इंसानियत की यह अद्भुत किस्सा उत्तराखंड के डोईवाला स्थित हिमालयन अस्पताल का है। अस्पताल का दावा है कि यह प्रदेश का पहला किडनी स्वैप ट्रांसप्लांट केस है। बिजनौर निवासी हिंदू युवक विकांशू (21) और मुरादपुर, हापुड़, उत्तरप्रदेश निवासी मुस्लिम युवक आश मोहम्मद की किडनियां खराब थीं।
ब्लड ग्रुप अपने परिजनों से नहीं मिला
दोनों के परिजन उपचार के लिए उन्हें हिमालयन अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. विकास चंदेल के पास लाए थे। बकौल डॉ. चंदेल विकांशू और आश मोहम्मद का ब्लड ग्रुप अपने परिजनों से नहीं मिल रहा था। ऐसे में उन्हें स्वैप ट्रांसप्लांट की सलाह दी गई है।
डॉ. चंदेल ने बताया कि आश मोहम्मद का ब्लड ग्रुप विकांशू के पिता ताहर सिंह से और आश मोहम्मद की मां रिजवाना का ब्लड ग्रुप विकांशू से मैच हो गया। यूरोलॉजी विभाग ने दोनों की जरूरी जांचें कराने के बाद दोनों के ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए दोनों विभागों की संयुक्त टीम बनाई गई। इसी टीम ने प्रदेश के पहले किडनी स्वैप ट्रांसप्लांट को अंजाम दिया।
ट्रांसप्लांट के बाद दोनों युवक स्वस्थ
नेर्फोलॉजिस्ट डॉ. विकास चंदेल ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को जीवनशैली में काफी एहतियात बरतने की जरूरत होती है। नियमित दवाइयों, खाने पीने में परहेज, संक्रमण और सफाई पर ध्यान रखना पड़ता है।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसएल जेठानी ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए हिमालयन अस्पताल में विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हैं। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद दोनों युवक स्वस्थ हैं।
ट्रांसप्लांट को सफल बनाने में डॉ. वीना अस्थाना, डॉ. प्रिया, डॉ. योगेश कालरा, शेर सिंह चौधरी, सुरेश डांगी, हिमानी, धर्मेन्द्र, बलदेव उनियाल, किडनी ट्रांसप्लांट कोर्डिनेटर जगदीप आदि का सहयोग रहा।