हिमाचल में धूमल की हार से 'फ्लैश बैक' में चली गई BJP, इस 'दमदार' नेता का भी हुआ था ये हाल
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हिमाचल प्रदेश में भाजपा के 'हॉट' कैंडीडेट प्रेम सिंह धूमल की हार से बीजेपी फ्लैश बैक में चली गई। मंत्री से लेकर कार्यकर्ताओं को भी वो एक नाम याद आ गया जिसका साल 2012 में यही हाल हुआ था।
उत्तराखंड की तुलना हिमाचल से सबसे ज्यादा होती है। पहाड़ का विकास उत्तराखंड अपने सबसे नजदीकी इसी पड़ोसी से सीखना चाहता है। राजनीतिक स्थितियों में भी काफी हद तक समानता है।
इस बार के एक चुनावी नतीजे ने हिमाचल और उत्तराखंड के कनेक्शन को और जोड़ दिया है। सीएम इन वेटिंग प्रेम कुमार धूमल की हार ने 2012 में बीसी खंडूड़ी की हार को बरबस याद दिला दिया है।
उस वक्त भी भाजपा ने अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन जिस खंडूड़ी को जरूरी बताते हुए चुनाव लड़ा गया था, वे खुद चुनावी रण में मात खा गए थे। प्रेम कुमार धूमल सुजानपुर सीट पर जिस तरह से हारे हैं, उसने हिमाचल में भाजपा की चुनावी जीत की खुशी को झटका दिया है।
जानिए पूरा मामला
ये ही स्थिति 2012 में कोटद्वार सीट पर बीसी खंडूड़ी के साथ पेश आई थी। खंडूड़ी उत्तराखंड भाजपा के सीएम इन वेटिंग थे। बकायदा एक स्लोगन प्रमोट किया गया था-खंडूड़ी हैं जरूरी।
हालांकि उस वक्त खंडूड़ी उस भाजपा की अगुवाई कर रहे थे, जो सत्तारूढ़ थी और खंडूड़ी की हैसियत कार्यवाहक सीएम की थी। खंडूड़ी की हार से भाजपा के भीतर की सांगठनिक एकता भी एक बड़ा मुद्दा बनी थी।
माना गया था कि भाजपा के ही कुछ लोगों ने खंडूड़ी को हरवाया है। अब प्रेम कुमार धूमल के संबंध में भी इस तरह की अटकलबाजी चलने लगी है। हिमाचल-उत्तराखंड के इस उदाहरण की समानता के बावजूद यहां कुछ अलग भी है। धूमल की हार के बावजूद भाजपा हिमाचल में सत्ता पर काबिज हो गई है, जबकि उत्तराखंड में भाजपा को सिर्फ एक सीट से विपक्ष की बेंच नसीब हुई थी।