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11 साल में 12 गुना बढ़ा ‘हाईटेंशन’ का खर्च, आपसे वसूली की तैयारी

Sat, 24 Dec 2016 10:18 AM IST
मनीष चंद्र भट्ट/अमर उजाला, देहरादून
मनीष चंद्र भट्ट/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 24 Dec 2016 10:18 AM IST
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high tension line cost Increased.
उत्पादन लागत बढ़ गई। - फोटो : Getty

फाइलों में उलझने की वजह से सिमली-श्रीनगर हाईटेंशन लाइन की लागत 11 वर्ष में 12 गुना से ज्यादा बढ़ गई। जिस काम को 10 करोड़ रुपये में पूरा होना था, उस पर 122 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े। वहीं, पिटकुल अब इसकी भरपाई उपभोक्ताओं की जेब से करने की जुगत में है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि कार्य में देरी का भार उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता है।

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पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड (पिटकुल) ने वर्ष 2005 में सिमली (चमोली) में 132 केवी का विद्युत सब स्टेशन और सिमली से श्रीनगर गढ़वाल के बीच हाईटेंशन लाइन बिछाने के कार्य की शुरुआत की थी। तब सब स्टेशन पर 12 करोड़ और हाईटेंशन लाइन पर 10 करोड़ रुपये खर्च होने थे।
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सब स्टेशन का निर्माण तो वर्ष 2008 में तय लागत और नियत समय पर पूरा हो गया, लेकिन हाईटेंशन लाइन बिछाने में देरी होती रही। लिहाजा लाइन बिछाने का काम फाइनल होने के बाद 30 अप्रैल 2016 को इसे चालू किया गया। इस हाईटेंशन लाइन को बिछाने में लगभग 122 करोड़ रुपये की लागत आ गई।
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अब पिटकुल ने उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग को भेजे टैरिफ वृद्धि प्रस्ताव में इस खर्च का भी तर्क दिया है। आयोग के चेयरमैन सुभाष कुमार ने कहा कि कार्य में देरी के लिए पिटकुल को जवाबदेही तय करनी होगी। इसका भार विद्युत उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता। आयोग पूरे तथ्यों का परीक्षण कर रहा है। 


ऐसे पड़ेगा उपभोक्ताओं पर असर
टैरिफ में बढ़ोतरी होने पर विद्युत वितरण कंपनी उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) को भी ट्रांसमिशन लाइनों को इस्तेमाल करने के एवज में पिटकुल को अधिक दर से भुगतान करना पड़ेगा। आमतौर पर यूपीसीएल इसकी भरपाई विद्युत उपभोक्ताओं से ही करता है।

फारेस्ट क्लीयरेंस में देरी के कारण लाइन बिछाने में देरी हुई। फारेस्ट क्लीयरेंस मिलते ही लाइन बिछाने का काम तेजी से शुरू कर पूरा किया गया।
-नीरज पाठक, अधीक्षण अभियंत, पिटकुल

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