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उत्तरकाशी से देहरादून तक विद्युत तारों से ‘हाईटेंशन’
मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 27 Sep 2015 12:18 PM IST
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उत्तरकाशी से देहरादून तक व्यस्ततम सड़क मार्गों के ऊपर विद्युत हाईटेंशन लाइनें खतरा बनी हैं। कई जगह रेलवे लाइनों के ऊपर से भी खतरे के तार पार हो रहे हैं।
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हाईटेंशन लाइनों की गार्डिंग न होने से खतरा बढ़ा है। विद्युत सुरक्षा विभाग के सर्वे में ये खुलासा हुआ है। विभाग ने ऊर्जा निगम और पिटकुल को चिह्नित जगहों पर हाईटेंशन लाइनों की गार्डिंग कराने के निर्देश दिए हैं। बीती जून में राजस्थान में बस के ऊपर हाईटेंशन लाइन गिरने से हुए हादसे के बाद उत्तराखंड में भी विद्युत सुरक्षा विभाग सर्वे कर रहा है।
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सर्वे में उत्तरकाशी, बड़कोट, नरेंद्रनगर, फकोट, चंबा, ऋषिकेश के बीच और देहरादून-ऋषिकेश राजमार्ग पर ऐसी कई जगहें मिली हैं, जहां बिना गार्डिंग किए हाईटेंशन विद्युत लाइनें सीधे सड़क के ऊपर से गुजर रही हैं। कुछ भीड़भाड़ वाले स्थानों के ऊपर से भी बिना गार्डिंग के हाईटेंशन जा रही हैं। रेलवे लाइनों के ऊपर से गुजर रही ऐसी लाइनें भी खतरे को न्यौता दे रही हैं।
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रिपोर्ट से यह भी पता लगा है कि भानियावाला से हरिद्वार रोड की तरफ 132 केवी की हाईटेंशन लाइन सड़क से बहुत कम ऊंचाई से गुजर रही है। इन लाइनों से कभी भी कोई बड़ा खतरा हो सकता है। उत्तराखंड विद्युत सुरक्षा विभाग के देहरादून जोन के विद्युत सुरक्षा अधिकारी आरपी कोटनाला ने बताया कि इस बारे में ऊर्जा निगम और पिटकुल को अवगत कराया गया है।
क्या है तारों की गार्डिंग
रेलवे क्रासिंग, रोड क्रासिंग, नदी या कोई ऐसी जगह जहां अक्सर भीड़भाड़ रहती है और उसके ऊपर से विद्युत हाईटेंशन लाइन गुजर रही है तो वहां पर हाईटेंशन लाइन के नीचे गार्डिंग (एक तरह के विद्युत तारों का जाल) की जाती है।
गार्डिंग को प्रभावी रूप से अर्थिंग (भूयोजित) किया जाना जरूरी है। इन जगहों पर अगर हाईटेंशन लाइन टूटती है तो वह गार्डिंग के ऊपर गिरेगी। गार्डिंग में अर्थिंग होने से लाइन ट्रिप होते ही संबंधित बिजली घर से विद्युत आपूर्ति स्वचालित तरीके से बंद हो जाएगी। इससे दुर्घटना रोकी जा सकती है।
निगम ने सभी जरूरी जगहों पर हाईटेंशन लाइनों की गार्डिंग की है। अगर विद्युत सुरक्षा विभाग ने कुछ और जगह चिह्नित की हैं तो वहां भी गार्डिंग कर दी जाएगी।
- मधुसूदन ईस्सर, ऊर्जा निगम के प्रवक्ता