हाईकोर्ट: सीमांत क्षेत्रों में 24 घंटे के अंदर हेलीकॉप्टर से उपलब्ध कराएं रोजमर्रा का सामान
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हाईकोर्ट ने पिथौरागढ़ जिले के सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों को दैनिक जरूरत की वस्तुओं को 24 घंटे में मुहैया कराने के निर्देश सरकार को दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि सरकार सीमावर्ती गांवों में भारत तिब्बत सीमा पुलिस से समन्वय बनाकर इस आदेश का पालन कराएं और वायु सेना की मदद भी लें।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने कहा कि उस क्षेत्र के लोगों को 24 घंटे के भीतर घी, गेहूं, धान, आटा, सब्जी, मसाले, माचिस, पाउडर दूध, कंबल और केरोसिन मुहैया कराया जाए।
कोर्ट ने इस आपूर्ति को शीतकाल में भी जारी रखने को कहा है। कोर्ट ने मुख्य सचिव से कहा कि वे इस आदेश के अनुपालन में वायु सेना की मदद लें। धारचूला निवासी महेंद्र सिंह बुदियाल की जनहित याचिका पर यह आदेश जारी करते हुए कोर्ट ने सरकार को दो सप्ताह में जवाब देने को कहा है।
क्या है मामला
याची के मुताबिक पिथौरागढ़ जिले के लमारी, बुंदी, गुंजी, चैयालेख, गर्ब्यांग, नपलच्यु, नाबी, रोगकोंग, कुटी, कालापानी और नाभीढांग की आबादी लगभग 9000 है। इस क्षेत्र में कोई सड़क नहीं है।
इन गांवों को केवल पगडंडियां ही आपस में जोड़ती हैं। 1999 से 2000 के बीच केंद्र सरकार ने सीमांत क्षेत्रों में सड़कों के महत्व को देखते हुए घटियाबागढ़ से लिपुलेख तक चार किलोमीटर मोटर मार्ग का प्रस्ताव स्वीकृत किया था।
बीआरओ अभी तक यह सड़क नहीं बना पाया है। क्षेत्र में हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की गई थी लेकिन उसका किराया 3100 रुपये प्रति व्यक्ति रखा गया। यह बहुत ज्यादा है और यह सेवा भी बिना नोटिस के बंद कर दी गई है। क्षेत्र में अब खाद्य सामग्री और अन्य रोजमर्रा का जरूरी सामान भी समाप्त हो गया है।