हाईकोर्ट के फैसले से उलझी मोदी सरकार, अब क्या होगा?
- फैसले से भाजपा और मोदी सरकार कानूनी पेच भी बुरी तरह उलझी।
- आदेश पर रोक नहीं लगी तो राज्य में रविवार को राष्ट्रपति शासन हटाना होगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सरकार फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने पर विचार कर रही है। अगर शीर्ष अदालत में हाईकोर्ट के आदेश पर रोक नहीं लगी तो सरकार को राज्य में रविवार को लगाया गया राष्ट्रपति शासन हटाना होगा।
शीर्ष अदालत में जाने के बदले नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले को स्वीकार करने की स्थिति में भी केंद्र को राष्ट्रपति शासन हटाना होगा। फिलहाल केंद्र सरकार और भाजपा हाईकोर्ट के फैसले के तकनीकी पेंच को समझने के लिए कानूनी राय ले रही है। हालांकि संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि हाईकोर्ट के फैसले के बावजूद कई सवाल अनसुलझे हैं।
बागी विधायकों पर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं
दरअसल भाजपा और सरकार को हाईकोर्ट से इस तरह के फैसले की उम्मीद नहीं थी। यही कारण है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के बाद इस पर संसद की सहमति लेने की प्रक्रिया से बचने के लिए पार्टी के रणनीतिकारों ने बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू होने से पहले सरकार गठन करने की रणनीति भी तैयार कर ली थी।
पार्टी के लिए मुश्किल यह है कि हाईकोर्ट ने कांग्रेस के 9 बागी विधायकों को भी शक्ति परीक्षण के दौरान मत डालने का अधिकार तो दिया है, मगर इनके मतों को फिलहाल अलग रखने का आदेश दिया है। ऐसे में भाजपा को डर इस बात का भी है कि कहीं इन विधायकों के मतों को अयोग्य घोषित कर रावत सरकार बहुमत न हासिल कर ले।