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राज्य आंदोलनकारी आरक्षण पर राज्यपाल के आदेश की प्रतीक्षा न करे सरकार: HC

Fri, 28 Oct 2016 11:00 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नैनीताल
ब्यूरो/ अमर उजाला, नैनीताल Updated Fri, 28 Oct 2016 11:00 AM IST
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high court on rajya andolankari reservasion.
नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : PTI

राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी सेवाओं में दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने के मामले में बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से साफ कहा कि आरक्षण की व्यवस्था को लागू करने के लिए सरकार राजभवन के आदेश की प्रतीक्षा न करें। सरकार ने आरक्षण संबंधित विधेयक दो नवंबर 2015 को गैरसैंण में हुए विधानसभा सत्र में पारित किया था।

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यह विधेयक तब से राजभवन में लंबित है। माना जा रहा है कि राजभवन भी इस विधेयक को पारित करने से पहले हाईकोर्ट के रुख का इंतजार कर रहा है।

 

न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा सरकार संविधान के अनुच्छेद 16 चार के तहत प्रशासनिक आदेशों और शासनादेश के जरिए इसे लागू कर सकती है। इसके लिए जरूरी नहीं कि राजभवन के आदेश की प्रतीक्षा की जाए।

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न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 16 का दिया हवाला

high court on rajya andolankari reservasion.
नैनीताल उच्च न्यायालय - फोटो : ‌file photo

सरकार की ओर से कहा गया था कि उत्तराखंड सरकार ने राज्य आंदोलनकारियों के क्षैतिज आरक्षण संबंधित विधेयक पारित किया है, लेकिन उस पर अभी राजभवन की सहमति नहीं मिली है।

न्यायालय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय इंद्रा साहनी बनाम यूनियन आफ इंडिया के परिपेक्ष में राज्य सरकार संविधान के अनुच्छेद 16 चार के तहत भी आरक्षण की व्यवस्था लागू कर सकती है। शासनादेश जारी करने के लिए राज्यपाल की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 16 नवंबर की तिथि की है।

उल्लेखनीय है कि आंदोलनकारियों के दबाव को देखते हुए सरकार ने पहले यह आरक्षण अध्यादेश के जरिए लागू करने का मन भी बनाया था।

राज्यपाल के खिलाफ हो रही व्यापक प्रदर्शन की तैयारी

high court on rajya andolankari reservasion.
राज्यपाल केके पॉल - फोटो : AmarUjala

आरक्षण विधेयक के लंबित होने से राज्य आंदोलनकारी खासे नाराज हैं और अब ये राज भवन के खिलाफ धरना प्रदर्शन पर भी उतर आए हैं। राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप के मुताबिक दो नवंबर से राज्यपाल के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन की तैयारी भी की जा रही है।

करीब एक साल से यह विधेयक राजभवन में लंबित है और अब राज्य आंदोलनकारियों का धीरज भी जवाब दे रहा है। दूसरी तरफ, हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद मामला एक बार फिर से राज्य सरकार के पाले में है।

राज्य आंदोलनकारियों को चिन्हित करने के मामले को लेकर विवाद है और इस कारण भी यह मामला उलझा हुआ है। कोर्ट के आदेश से उत्साहित धीरेंद्र प्रताप इसे राज्य आंदोलनकारियों के लिए दीपावली का तोहफा बता रहे हैं।

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