छात्रवृत्ति घोटाले में सीएस के जवाब से हाईकोर्ट असंतुष्ट, सरकार से एक हफ्ते में दोबारा मांगा जवाब
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करीब 500 करोड़ के अनुसूचित जाति /जनजाति छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में शुक्रवार का मुख्य सचिव की ओर से पेश किए गए जवाब से हाईकोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति रमेश चंद्र खुल्बे की खंडपीठ ने सरकार को सात जनवरी तक विस्तृत शपथपत्र पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट में एसआईटी के अध्यक्ष ने भी साफ कहा कि जांच में समाज कल्याण विभाग का कोई सहयोग नहीं मिल रहा है।
देहरादून निवासी रविंद्र जुगरान की याचिका पर सुनवाई में खंडपीठ के सामने मुख्य सचिव का शपथपत्र पेश किया गया। शपथपत्र में मुख्य सचिव और समाज कल्याण विभाग की जांच रिपोर्ट संलग्न की गई थी। इस रिपोर्ट से खंडपीठ संतुष्ट नहीं हुई। पूर्व में हुई सुनवाई में जांच से संतुष्ट न होने पर ही कोर्ट ने सरकार से कहा था कि क्यों न इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए।
कोर्ट में पेश हुए एसआईटी के अध्यक्ष डाक्टर के मंजुनाथ ने कहा कि जांच के लिए उन्होंने जिला समाज कल्याण अधिकारी व संयुक्त निदेशक से सूचना मांगी थी लेकिन अभी तक कोई भी सूचना संबंध में उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गयी है और न ही सहयोग किया गया है। एसआईटी ने अभी तक सामान्य लोगों की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के आधार पर ही जांच की है।
याची का कहना था कि प्रदेश के हजारों अनुसूचित जाति / जनजाति के छात्रों को केंद्र सरकार छात्रवृत्ति देती है। समाज कल्याण विभाग ने यह छात्रवृत्ति न बांटकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया है। इसमें 500 करोड़ से अधिक का घपला हुआ है। इस घपले के तार राज्य से बाहर भी जुड़े हैं।
इस प्रकरण की जांच सीबीआई से कराई जाय। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 में एसआईटी से जांच कराई थी। दोषियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नही की गयी। सरकार का कहना था कि एक दिसंबर 2018 को एसआईटी ने सिडकुल हरिद्वार थाने में देहरादून व हरिद्वार जिले में हुए घपले के संबंध में आईपीसी की धारा 420 का मुकदमा दर्ज कराया।
कोर्ट ने पूर्व में मुख्य सचिव को पक्षकार बनाया था और एसआईटी के अध्यक्ष डाक्टर के मंजूनाथ और अपर सचिव रणवीर सिंह को दस्ती नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने पूर्व में जांच कर रहे अपर सचिव समाज कल्याण को हटाये जाने का भी संज्ञान लिया था। कोर्ट ने माना है कि जनता के पैसों का दुरुपयोग हुआ है।