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नोटबंदी: HC ने केंद्र से पूछा, को-ऑपरेटिव बैंकों में क्यों नहीं जमा हो रहा पैसा?

Sat, 26 Nov 2016 01:09 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नैनीताल
ब्यूरो/ अमर उजाला, नैनीताल Updated Sat, 26 Nov 2016 01:09 AM IST
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high court asked center on noteban in co operatives bank.
नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : PTI

हाईकोर्ट ने जिला सहकारी बैंकों में 500 और एक हजार के नोट जमा करने की केंद्र सरकार की पाबंदी के मामले पर सुनवाई के बाद केंद्र सरकार को 29 नवंबर तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।

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शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई  हुई। हल्द्वानी निवासी अधिवक्ता नीरज तिवारी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सरकार ने 9 नवंबर 2016 से 500 और 1000 के नोटों को बंद कर दिया था।
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उस समय कहा गया था कि नोट बैंकों, जिला सहकारी बैंकों व समितियों में जमा कराए जा सकते हैं। 14 नवंबर को रिजर्व बैंक ने अधिसूचना जारी कर सहकारी बैंकों एवं सोसाइटी में नोट जमा कराने पर पाबंदी लगा दी थी।

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सहकारी बैंकों में अधिकतर खातेदार किसान और ग्रामीण

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नोटबंदी के विरोध में सहकारी बैंक एक दिन की हड़ताल पर रहे। - फोटो : AmarUjala

याचिकाकर्ता का कहना था कि सहकारी बैंकों में अधिकतर खातेदार किसान और ग्रामीण क्षेत्रों के हैं। किसानों के फसल का पैसा और किसानों द्वारा लिया गया लोन सहकारी बैंकों में जमा नहीं हो पा रहा है।

अगली फसल बोने के लिए किसान के पास पैसे भी नहीं है। याचिकाकर्ता का कहना था कि इससे फसलों की बुआई तक प्रभावित हो रही है।

आने वाले समय में खाद्यान की समस्या हो सकती है। किसान ऋण नहीं ले पा हैं। याचिका में कहा कि केंद्र के इस निर्णय से किसानों के समक्ष आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

पूछा, किसानों की दिक्कत पर केंद्र ने क्या किए हैं उपाय

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याचिकाकर्ता ने केंद्र से अपने इस फैसले को वापस लेने का आग्रह किया।  कोर्ट ने केंद्र सरकार से जानना चाहा कि किसानों का पैसा क्यों नहीं जमा हो पा रहा है और यदि फसल बोने में किसानों को दिक्कत आएगी और आगे फसल न होने पर सरकार की ओर से क्या उपाय किए गए हैं। खंडपीठ ने केंद्र को 29 नवंबर तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए।

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