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उत्तराखंड के दुर्गम गांव में दुर्लभ जड़ी-बूटियों की नर्सरी
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 28 May 2016 09:36 AM IST
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herbal nursery in tehri garhwal
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टिहरी गढ़वाल के दूरस्थ और दुर्गम गांव गंगी में मूल्यवान और दुर्लभ जड़ी-बूटियों की नर्सरी स्थापित की गई है। करीब साढ़े आठ हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित सीमांत गांव गंगी की जलवायु को जड़ी-बूटी उत्पादन के लिए बेहद मुफीद माना गया है।
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प्रसिद्ध आयुर्वेद चिकित्सक वैद्य बालेंदु प्रकाश बताया कि इस क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से कई जड़ी-बूटियां उगती हैं। हालांकि स्थानीय लोगों को बहुत कम जानकारी होने से बड़े पैमाने पर उगने वाली वनस्पतियां उपेक्षित हैं। उन्होंने बताया कि रक्त कैंसर के एक खास किस्म के उपचार में प्रयुक्त होने वाली औषधि जदवार निर्विशीद बूटी यहां बड़े पैमाने पर प्राकृतिक रूप से उगती है।
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चिकित्सा विज्ञान में बढ़ते उपयोग के चलते इसकी कीमत हजारों रुपये तक पहुंच चुकी है। इसको देखते हुए स्थानीय लोगों को शामिल कर क्षेत्र में नर्सरी स्थापित की गई है। उन्होंने बताया कि गंगी गांव के युवा भेड़ पालक बीर सिंह की जड़ी-बूटी उत्पादन में दिलचस्पी को देखते हुए साढ़े सात नाली भूमि चयनित की गई है।
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क्षेत्र में नर्सरी लगाने की कवायद मार्च से शुरू हुई। हालांकि सरकारी एजेंसियां चिह्नित क्षेत्र में लगाने के लिए पर्याप्त मात्रा में अतीश, जदवार, चिरायता, कूट और वसना के बीज तक उपलब्ध नहीं करा पाईं। ऐसे में सरकार का उत्तराखंड को आयुष प्रदेश के रूप में स्थापित करने का दावा हवाई प्रतीत होता है।
एचआरडीआई, यूकॉस्ट और प्रगतिशील किसान गौरव नेगी के प्रयासों से बीज लेकर लगाया गया है। इन पौधों को यहां बड़े पैमाने पर लगाने की योजना है। इससे आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र जड़ी-बूटी उत्पादन के क्षेत्र में विशिष्ट पहचाने बनाने में सफल होगा। इससे स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार भी उपलब्ध हो सकेगा।
उपेक्षित है गंगी गांव
स्वतंत्रता के कई दशक बाद भी गंगी गांव सरकारों की उपेक्षा का शिकार है। विकास की रोशनी आज तक इस गांव के आसपास नहीं पहुंच पाई। मौजूदा वक्त में गंगी में 120 परिवारों के करीब 700 लोग निवास करते हैं। बेहद दूरस्थ और विषम भौगोलिक परिस्थितियों के चलते यहां लोगों को बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। भोजन में पोषक तत्वों की कमी के चलते लोगों के शरीर में कमजोरी के लक्षण साफ देखे जा सकते हैं। बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं भी गांव के लोगों को मयस्सर नहीं है।