सावधान! देश के इस राज्य में तेजी से फैल रही ये घातक बीमारी
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मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलोजी विभाग में हुई रिसर्च में खतरनाक खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक देश के एक हिस्से में घातक बीमारी तेजी फैल रही है।
मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलोजी विभाग में हुई रिसर्च के मुताबिक तराई में हेपेटाइटिस सी तेजी के साथ फैल रहा है। हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल के मेडिसिन विभाग में भी हेपेटाइटिस सी के प्रतिमाह 90 से 100 मरीज आ रहे हैं।
कुछ सावधानी बरतकर इस खतरनाक बीमारी से बचा जा सकता है। शोध में इस बात का भी पता चला है कि हेपेटाइटिस सी का जीनोटाइप कनाडा के जीनोटाइप से बहुत हद तक मिलता-जुलता है।
दो दिन ओपीडी में लगभग 400 से 450 मरीज
साथ ही खून के नमूने रिसर्च के लिए मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलाजी लैब में भी भेजे थे। 2013 में जब 39 नमूनों पर माइक्रोबायोलाजी विभाग में शोध किया गया तो पता चला कि सभी हेपेटाइटिस सी से ग्रस्त हैं।
शोध में इस बात का भी पता चला कि हेपेटाइटिस सी का जीनोटाइप कनाडा के जीनोटाइप से मिलता जुलता है। डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि वे सप्ताह में दो दिन ओपीडी में लगभग 400 से 450 मरीज देखते हैं। एक माह लगभग 1500 से 1600 मरीज देखते हैं।
रक्त चढ़ाने वाले मरीजों में भी हेपेटाइटिस सी होने की संभावना
इसके अलावा मेडिसिन विभाग में प्रोफेसर एवं असिस्टेंट प्रोफेसर भी मरीजों को देखते हैं। एक माह में लगभग सौ मरीज हेपेटाइटिस सी के तराई से रिपोर्ट होते हैं।
डॉ. कुमार ने बताया कि सितारगंज, रुद्रपुर, काशीपुर, रामपुर और बिलासपुर से हेपेटाइटिस सी के मरीज आते हैं। उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस सी ब्लड बॉर्न बीमारी है।
उन्होंने कहा कि ड्रग्स लेने वाले एक-दूसरे के साथ सुई शेयर करते हैं। ऐसे लोगों में हेपेटाइटिस सी सबसे अधिक होता है। गर्भवती मां से बच्चे में या असुरक्षित शारीरिक संबंध बनाने से भी हेपेटाइटिस सी होने की संभावना होती है। कहा कि कई वर्ष पूर्व सर्जरी (ऑपरेशन) कराने या आपरेशन के दौरान रक्त चढ़ाने वाले मरीजों में भी हेपेटाइटिस सी होने की संभावना होती है।
नशे में सुई का प्रयोग करने वालों में भी ये बीमारी होने की संभावना
कई बार झोलाछाप सुई को बिना उबाले एक-दूसरे मरीजों में लगाते रहते हैं। साथ ही नशे में सुई का प्रयोग करने वालों में भी हेपेटाइटिस सी होने की संभावना सबसे अधिक होती है। तराई के लोग विदेश अधिक जाते हैं इसलिए शोध के दौरान कनाडा का जीनोटाइप सामने आया है।
- डॉ. विनीता रावत, एसोसिएट प्रोफेसर, माइक्रोबायोलाजी विभाग, राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी
हेपेटाइटिस सी के लक्षण शुरुआत में नहीं पता चलते हैं। बहुत अधिक कमजोरी लगना, बेहाशी आना, वजन कम होना, पेट में पानी भरना आदि होने लगता है। देर में पता चलने पर हेपेटाइटिस सी से लीवर काफी खराब हो जात है और इलाज करना मुश्किल होता है। लोगों को समय-समय पर जांच कराते रहना चाहिए। समय पर पता लगने पर इलाज संभव है।
- डॉ. अशोक कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी