कल से खुलेंगे हेमकुंड साहिब तीर्थ के कपाट
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सिखों के प्रसिद्ध तीर्थ हेमकुंड साहिब के कपाट 25 मई रविवार को सुबह आठ बजे खोले जाएंगे।
इससे पहले शनिवार को यात्रा के लिए गोविंदघाट से तीन हजार यात्रियों के जत्था रवाना हुआ। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने यात्रा के पहले जत्थे को रवाना किया।
बीते साल की आपदा और रास्तों की दुश्वारियों के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है। शुक्रवार शाम तक ही ढाई हजार से ज्यादा श्रद्धालु हेमकुंड साहिब के मुख्य पड़ाव गोविंदघाट पहुंच गए थे।
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मुख्य प्रबंधक सेवा सिंह का कहना है कि हेमकुंड साहिब सहित पैदल मार्ग के पड़ाव घांघरिया में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
सात शिखरों के बीच स्थित हेमकुंड साहिब
सिखों का प्रमुख तीर्थ श्री हेमकुंड साहिब चमोली जनपद के जोशीमठ क्षेत्र में सात शिखरों के बीच 4329 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह पवित्र स्थान छह माह तक पूरी तरह बर्फ से ढका रहता है।
इस स्थान पर सिखों के दशम पिता गुरु गोविंद सिंह ने तपस्या की थी। यहां प्रत्येक वर्ष देश और दुनियाभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। वर्ष 1933 में टिहरी के ग्रंथी संत सोबन सिंह ने इस स्थान की खोज की थी।
इसके बाद अहोलदर बाबा मोदन सिंह ने यहां भव्य गुरुद्वारे का निर्माण कराया था। श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे के पास पवित्र सरोवर और लक्ष्मण मंदिर स्थित है।
पैदल दूरी तय कर यहां आने वाले तीर्थयात्रियों को गोविंदघाट से श्री हेमकुंड साहिब के लिए 20 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़नी होती है।
दिल्ली से है 513 किलोमीटर की दूरी
हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा काफी श्रमसाध्य है। कहा जाता है कि बिना गुरु कृपा के यहां लोग नहीं पहुंच पाते। यहां आने के लिए ऋषिकेश तक रेल मार्ग है।
उसके बाद वाहन द्वारा 272 किलोमीटर की दूरी तय करके गोविंदघाट पहुंचा जा सकता है। यहां से 19 किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर पवित्र हेमकुंड साहिब और लक्ष्मण लोकपाल मंदिर पहुंचा जा सकता है।
गोविंदघाट से 13 किमी की दूरी पर घांघरिया नामक स्थान है। हेमकुंड साहिब में ठहरने की व्यवस्था न होने पर तीर्थयात्री हेमकुंड के दर्शन के पश्चात रात्रि विश्राम के लिए 6 किमी नीचे वापस घांघरिया पहुंचते हैं।
अधिक ऊंचाई पर होने के कारण यहां मौसम काफी ठंडा रहता है। दिल्ली से गोविंदघाट तक बस से भी आया जा सकता है। दिल्ली से गोविंदघाट की दूरी 513 किमी है।
घांघरिया से फूलों की घाटी भी पहुंच सकते हैं
यदि आप हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा पर आने का मन बना रहे हैं तो थोड़ा समय अधिक लेकर आएं। यात्रा मार्ग के मध्य में स्थित घांघरिया से विश्व धरोहर फूलों की घाटी के लिए पैदल मार्ग है।
हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने के साथ ही फूलों की घाटी भी पर्यटकों के लिए खुल जाती है। यहां नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रभाग के अधिकारी व कर्मचारी पर्यटकों के लिए गाइड की व्यवस्था भी करते हैं।
लक्ष्मण के शेषनाग रूप के भी करिए दर्शन
हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे के समीप ही लोकपाल मंदिर स्थित है। जिसे लक्ष्मण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
पौराणिक मान्यता है कि इस स्थान पर लक्ष्मण ने शेषनाग के रूप में तपस्या की थी। यहां स्थित लक्ष्मण मंदिर में भ्यूंडार गांव के ग्रामीण पूजा-अर्चना करते हैं। यहां प्रतिवर्ष स्थानीय मेले भी आयोजित किए जाते हैं।
डंडी-कंडी का यह है किराया
हेमकुंड साहिब की इस पैदल यात्रा को सुखद बनाने के लिए गोविंदघाट में डंडी, कंडी और घोडे़ मौजूद रहते हैं। डंडी संचालक वजन के हिसाब से तीन दिन का पैकेज लेकर तीर्थयात्रियों को हेमकुंड साहिब तक ले जाते हैं।
डंडी - 8000 रुपए (वयस्क तीर्थयात्री)
डंडी - 2500 रुपए (शिशु यात्री)
कंडी - 3000 रुपए
घोड़ा - 3000 रुपए
हेलीकाप्टर सुविधा भी उपलब्ध
हेमकुंड साहिब तीर्थ धाम जाने के लिए इस बार गोविंदघाट से हेलकॉप्टर व्यवस्था भी है। यहां से 14 किमी की दूरी पर स्थित कांजिला नामक स्थान पर स्थित हेलीपैड तक तीर्थयात्री हेलीकॉप्टर से भी यात्रा कर सकते हैं।
यहां डेक्कन कंपनी का हेलीकॉप्टर अपनी सेवाएं देगा। हेलीकॉप्टर में सिर्फ जाने के 3200 रुपए और आने-जाने के 6400 रुपए लिए जाएंगे। कांजिला से हेमकुंड साहिब तीर्थ मात्र पांच किमी की दूरी पर स्थित है।
यात्रा संबंधित जानकारी के लिए यहां संपर्क करें
बीते वर्ष की जलप्रलय को ध्यान में रखने हुए इस बार गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी यात्रा की समय सारणी तय की है।
तय किया गया कि दोपहर दो बजे के बाद गोविंदघाट से किसी भी तीर्थयात्री को हेमकुंड साहिब जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
तीर्थयात्रियों को जत्थों में रवाना किया जाएगा। बारिश और बर्फबारी होने पर तीर्थयात्रियों को भ्यूंडार, घांघरिया, गोविंदघाट और हेमकुंड धाम में रोक लिया जाएगा।
ऋषिकेश गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी- 7500241970, 71 और 72
जोशीमठ गुरुद्वारा- 7500241976
गोविंदघाट गुरुद्वारा कमेटी- 7579041090
वेबसाइट- www.gurudwarasrihemkundsahib.com
(डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट गुरुद्वाराश्री हेमकुंड साहिब डॉट कॉम)
यात्रा के दौरान यहां है ठहरने की व्यवस्था
यात्रा के दौरान तीर्थयात्री गुरुद्वारा हरिद्वार, ऋषिकेश, श्रीनगर, जोशीमठ, गोविंदघाट और गोविंदघाम घांघरिया में रात्रि विश्राम के लिए ठहर सकते हैं। यहां खानपान की भी उचित व्यवस्था रहती है। इन गुरुद्वारों में प्रतिदिन लंगर भी लगते हैं।