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कुंभ, कांवड़, चारधाम में मजबूत होगा स्वास्थ्य तंत्र: खुलेगा एनसीडीसी केंद्र, दिल्ली पर निर्भरता होगी कम

Sun, 20 Sep 2026 03:29 PM IST
Alka Tyagi अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Sun, 20 Sep 2026 03:29 PM IST
सार

सरकार ने तीन सप्ताह पहले कैबिनेट में निर्णय लेने के बाद अब हरिद्वार स्थित मेडिकल कॉलेज की 65 एकड़ भूमि में से एक एकड़ भूमि 99 साल की लीज पर संस्थान को दी है।

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Healthcare infrastructure to be strengthened for Kumbh Kanwar and Char Dham in Uttarakhand
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी - फोटो : सूचना

विस्तार

अब उत्तराखंड में भारी भीड़ वाले कुंभ, कांवड़ यात्रा, चारधाम यात्रा में स्वास्थ्य तंत्र मजबूत होगा। स्वाइन फ्लू, मंकीपॉक्स, डेंगू, कोरोना जैसी महामारियों की पहचान तेजी से हो सकेगी। धामी सरकार ने प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) नई दिल्ली की अत्याधुनिक शाखा हरिद्वार में खोलने के लिए एक एकड़ भूमि आवंटित कर दी है। इसका शासनादेश जारी हो गया।

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सरकार ने तीन सप्ताह पहले कैबिनेट में निर्णय लेने के बाद अब हरिद्वार स्थित मेडिकल कॉलेज की 65 एकड़ भूमि में से एक एकड़ भूमि 99 साल की लीज पर संस्थान को दी है। सचिव स्वास्थ्य विनय शंकर पांडेय ने इस संबंध में आदेश जारी किया। सेंटर की स्थापना से उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेगा। यहां चारधाम यात्रा, कांवड़ मेला, कुंभ जैसे विशाल आयोजनों में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में किसी भी संक्रामक रोग (जैसे स्वाइन फ्लू, डेंगू, मंकीपॉक्स, कोरोना या अज्ञात वायरल बुखार) के फैलने का खतरा हमेशा बना रहता है।
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एनसीडीसी सेंटर से किसी भी नए वायरस या बैक्टीरिया का समय रहते पता लगाकर त्वरित नियंत्रण किया जा सकेगा। यहां होने वाले विशाल जनसमूह वाले आयोजनों में जलजनित और वायुजनित बीमारियों की रियल-टाइम सर्विलांस और मॉनिटरिंग सीधे केंद्र सरकार के विशेषज्ञों की देखरेख में हो सकेगी।
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दिल्ली पर निर्भरता हो जाएगी खत्म
वर्तमान में किसी भी गंभीर वायरस या अज्ञात बीमारी के नमूनों की हाई-टेक जीनोम सीक्वेंसिंग और जांच के लिए दिल्ली या पुणे स्थित प्रयोगशालाओं में भेजना पड़ता है। इसकी जांच रिपोर्ट आने में थोड़ा समय भी लगता है। हरिद्वार में आधुनिक बीएसएल (बायो-सेफ्टी लेवल) लैब स्थापित होने से घंटों के भीतर सटीक जांच परिणाम मिल सकेंगे।

जानवरों से फैलने वाले रोगों पर भी होगा शोध
उत्तराखंड का बड़ा भू-भाग वनों से आच्छादित है, जिससे जानवरों से इंसानों में फैलने वाले रोगों (स्क्रब टाइफस, लेप्टोस्पायरोसिस, रेबीज आदि) का जोखिम रहता है। एनसीडीसी की टीम स्थानीय पर्यावरणीय परिस्थितियों पर विशेष शोध कर सकेगी। राजकीय मेडिकल कॉलेज हरिद्वार के परिसर में ही यह केंद्र होने से स्थानीय मेडिकल छात्रों, शोधकर्ताओं और डॉक्टरों को महामारी विज्ञान, वायरोलॉजी और पब्लिक हेल्थ सर्विलांस में आधुनिक अनुसंधान और प्रशिक्षण का सीधा लाभ मिलेगा।

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