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अफसरों के असंतोष से अस्पताल हुए 'बीमार'
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 31 Dec 2013 12:27 PM IST
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उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त बनाने के लिए स्वास्थ्य मंत्री का दावा भी बेमानी साबित हो रहा है।
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आंदोलन करने की चेतावनी
नर्सों का कार्य बहिष्कार चल रहा है जबकि चिकित्सक नए साल पर आंदोलन करने की चेतावनी दे चुके हैं। यूजर्स चार्जेस से मरीजों पर बोझ न बढ़ने देने का स्वास्थ्य मंत्री का दावा पिछले बरस की तरह इस बार सिरे चढ़ता नहीं दिख रहा है।
महकमे में एक बरस से सभी संवर्ग के कर्मचारियों और अधिकारियों के असंतोष का इलाज मंत्री नहीं तलाश पाए हैं।
महकमा विश्व बैंक से हेल्थ सिस्टम सुधारने की कई सौ करोड़ की फंडिंग से लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के करोड़ों के प्लान बनाने में जुटा है, लेकिन कई माह से विभिन्न विभागीय संवर्गों के कार्य बहिष्कार, हड़ताल, आंदोलन और धरना प्रदर्शन का हल न विभागीय मंत्री के पास है न ही शासन समाधान तलाश पाया है।
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नहीं तलाश रहे आंदोलनों का इलाज
एएनएम की हड़ताल से इस बरस की शुरूआत हुई। उसके बाद आपदा में विभाग की मानव संसाधन को लेकर फजीहत हुई तो केंद्र ने मदद भेजी।
आपदा के बाद पहले नर्सें फिर फार्मासिस्ट और लैब टेक्निशियन, संविदा कर्मचारी और अब एक बार दोबारा नर्सों के कार्यबहिष्कार से साल समाप्त हो रहा है। नए साल में नर्सों के आंदोलन के साथ 6 जनवरी से डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार की चुनौती खड़ी है।
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मरीजों का नहीं हल्का कर पाए बोझ
स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने पिछले बरस के समाप्ती पर यूजर्स चार्जेज न बढ़ाने का दावा किया, लेकिन बाद में मंत्री यह बोलकर बैकफुट पर आए कि अगले साल मरीजों पर बिल्कुल बोझ नहीं डालने देंगे। इस बार मंत्री ने दावा जताया कि 26 दिसंबर कैबिनेट में यूजर्स चार्जेज का मामला लाएंगे, लेकिन प्रस्ताव नहीं आया।
फेरबदल में उलझा महकमा
महकमे में कर्मचारी तो दूर विभागाध्यक्ष से लेकर शासन में विभागीय सचिवों की तैनाती में स्थिरता नहीं दिखी है। 2013 में चार डीजी बदले गए।
वर्ष के अंत में शासन स्तर पर एक साथ प्रमुख सचिव और अपर सचिव को सरकार ने बदल दिया गया। अब स्थिति यह है कि विभागाध्यक्ष और विभागीय सचिव नए हैं जबकि उनके सामने पुरानी चुनौतियां सर उठाए खड़ी हैं।