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शर्मा के बहाने हजकां विधायक तोड़ने का बदला लेंगे बिश्नोई!
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 06 Mar 2014 09:19 AM IST
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राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बुधवार को कांग्रेस छोड़ने वाले पूर्व मंत्री विनोद शर्मा के साथ हरियाणा के छह पार्टी विधायक भी हजकां में शामिल हो सकते हैं। शर्मा समेत इन विधायकों को अपने पाले में लाकर हजकां प्रमुख कुलदीप बिश्नोई 2009 में पार्टी विधायक दल को तोड़ने का बदला मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस से लेने में सफल होंगे।
उल्लेखनीय है कि 2009 के विधानसभा चुनाव में हजकां के 6 विधायक जीते थे। तब 40 सीटें जीतने वाली कांग्रेस ने हजकां के पांच विधायकों को तोड़कर बहुमत का आंकड़ा हासिल किया था। अब कुलदीप बिश्नोई उसी का बदला लेना चाहते हैं।
कहा जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री रह चुके शर्मा को करनाल (अगर भाजपा ने यहसीट हजकां को दी) या हजकां के खाते में आने वाली दूसरी सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा सकते हैं। अगर शर्मा समेत सात विधायक हजकां में जाते हैं तो यह मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री के लिए बड़ा झटका होगा। इसके अलावा शर्मा के आने से हरियाणा में भाजपा-हजकां गठबंधन के पक्ष में गैर जाट वोटों का ध्रुवीकरण पूरा हो सकता है।
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हुड्डा सरकार की मुश्किल बढ़ सकती है
राज्य की कांग्रेस सरकार 90 सदस्यीय सदन में अपने 46 विधायकों के अलावा सात निर्दलीय और एक बसपा विधायक के समर्थन के साथ मजबूत स्थिति में है। लेकिन शर्मा समेत सात विधायकों के पाला बदलने से स्थिति इतनी सुविधापूर्ण नहीं रहेगी। नौ से ज्यादा विधायकों के साथ छोड़ने की स्थिति में कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ जाएगी। ऐसे में विधानसभा चुनाव भी समय से पहले हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने मनाया लेकिन विफल रहे
प्रदेश कांग्रेस चुनाव समिति से इस्तीफा देने के साथ ही विनोद शर्मा की पार्टी से नाराजगी सामने आई थी। इसके अलावा वे विधानसभा के बजट सत्र में एक भी दिन नहीं पहुंचे। मुख्यमंत्री ने उन्हें विधानसभा में अपने दफ्तर में बुलाकर मनाने का प्रयास किया था, मगर शर्मा नहीं माने।
मुख्यमंत्री के नजदीकी सूत्रों ने बताया कि हुड्डा अपने दोस्त से बेहद नाराज हैं। हरियाणा में विनोद शर्मा को मुख्यमंत्री का सबसे करीबी माना जाता है। अंबाला लोकसभा क्षेत्र में कुमारी सैलजा और विनोद शर्मा के बीच आईएमटी बनाने या न बनाने पर छतीस का आंकड़ा रहा।
जब सैलजा राज्यसभा पहुंची तो शर्मा ने कहा कि सैलजा को चुनाव
लड़ना चाहिए था। अब शर्मा के पार्टी छोड़ने की चर्चाएं चलीं तो सैलजा ने जवाब दिया कि पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ता।
नाराजगी का कारण यह भी
बेटे मनु शर्मा को जेसिका हत्याकांड में सजा होने पर विनोद शर्मा को हरियाणा के कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। हुड्डा के पहले कार्यकाल में ही नहीं बल्कि दुबारा कांग्रे सरकार बनने पर भी वे मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए गए। हालांकि मुख्यमंत्री ने उन्हें एक प्रकार से कैबिनेट मंत्री जैसा सम्मान दे रखा है मगर शर्मा इससे संतुष्ट नहीं हुए।
7 मार्च का दिन भी अहम
पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, उनके बेटे अजय चौटाला और विधायक शेर सिंह बड़शामी को निचली अदालत से सुनाई सजा की अपील पर हाईकोर्ट में 7 मार्च को सुनवाई होगी। सबकी निगाहें उसी सुनवाई पर टिकी हैं।
राहत मिलने की स्थिति में इनेलो से भाजपा का गठबंधन होने की संभावना है। सजा बरकरार रहने या फैसला सुनिश्चित रखे जाने पर यह गठजोड़ मुश्किल होगा।
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उल्लेखनीय है कि 2009 के विधानसभा चुनाव में हजकां के 6 विधायक जीते थे। तब 40 सीटें जीतने वाली कांग्रेस ने हजकां के पांच विधायकों को तोड़कर बहुमत का आंकड़ा हासिल किया था। अब कुलदीप बिश्नोई उसी का बदला लेना चाहते हैं।
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कहा जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री रह चुके शर्मा को करनाल (अगर भाजपा ने यहसीट हजकां को दी) या हजकां के खाते में आने वाली दूसरी सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा सकते हैं। अगर शर्मा समेत सात विधायक हजकां में जाते हैं तो यह मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री के लिए बड़ा झटका होगा। इसके अलावा शर्मा के आने से हरियाणा में भाजपा-हजकां गठबंधन के पक्ष में गैर जाट वोटों का ध्रुवीकरण पूरा हो सकता है।
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हुड्डा सरकार की मुश्किल बढ़ सकती है
राज्य की कांग्रेस सरकार 90 सदस्यीय सदन में अपने 46 विधायकों के अलावा सात निर्दलीय और एक बसपा विधायक के समर्थन के साथ मजबूत स्थिति में है। लेकिन शर्मा समेत सात विधायकों के पाला बदलने से स्थिति इतनी सुविधापूर्ण नहीं रहेगी। नौ से ज्यादा विधायकों के साथ छोड़ने की स्थिति में कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ जाएगी। ऐसे में विधानसभा चुनाव भी समय से पहले हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने मनाया लेकिन विफल रहे
प्रदेश कांग्रेस चुनाव समिति से इस्तीफा देने के साथ ही विनोद शर्मा की पार्टी से नाराजगी सामने आई थी। इसके अलावा वे विधानसभा के बजट सत्र में एक भी दिन नहीं पहुंचे। मुख्यमंत्री ने उन्हें विधानसभा में अपने दफ्तर में बुलाकर मनाने का प्रयास किया था, मगर शर्मा नहीं माने।
मुख्यमंत्री के नजदीकी सूत्रों ने बताया कि हुड्डा अपने दोस्त से बेहद नाराज हैं। हरियाणा में विनोद शर्मा को मुख्यमंत्री का सबसे करीबी माना जाता है। अंबाला लोकसभा क्षेत्र में कुमारी सैलजा और विनोद शर्मा के बीच आईएमटी बनाने या न बनाने पर छतीस का आंकड़ा रहा।
जब सैलजा राज्यसभा पहुंची तो शर्मा ने कहा कि सैलजा को चुनाव
लड़ना चाहिए था। अब शर्मा के पार्टी छोड़ने की चर्चाएं चलीं तो सैलजा ने जवाब दिया कि पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ता।
नाराजगी का कारण यह भी
बेटे मनु शर्मा को जेसिका हत्याकांड में सजा होने पर विनोद शर्मा को हरियाणा के कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। हुड्डा के पहले कार्यकाल में ही नहीं बल्कि दुबारा कांग्रे सरकार बनने पर भी वे मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए गए। हालांकि मुख्यमंत्री ने उन्हें एक प्रकार से कैबिनेट मंत्री जैसा सम्मान दे रखा है मगर शर्मा इससे संतुष्ट नहीं हुए।
7 मार्च का दिन भी अहम
पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, उनके बेटे अजय चौटाला और विधायक शेर सिंह बड़शामी को निचली अदालत से सुनाई सजा की अपील पर हाईकोर्ट में 7 मार्च को सुनवाई होगी। सबकी निगाहें उसी सुनवाई पर टिकी हैं।
राहत मिलने की स्थिति में इनेलो से भाजपा का गठबंधन होने की संभावना है। सजा बरकरार रहने या फैसला सुनिश्चित रखे जाने पर यह गठजोड़ मुश्किल होगा।