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...जेब कतरे तक विधायक हो गए
अमर उजाला, डोईवाला
Updated Sat, 31 May 2014 12:30 PM IST
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हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ हास्पिटल ट्रस्ट जौलीग्रांट के रजत जयंती समारोह के तीसरे दिन हास्य कवि सम्मेलन में प्रख्यात रचनाकारों ने व्यवस्थाओं पर तंज कसे। मंच जब अर्थदायक हो गए...तोतले भी गीत गायक हो गए...राजनीतिक मूल्य कुछ ऐसे गिरे...जेबकतरे तक विधायक हो गए, रचना ने श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी।
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जौलीग्रांट स्थित एचआईएचटी परिसर में आयोजित हास्य कवि सम्मेलन में प्रसिद्ध हास्य कवि डा. अशोक चक्रधर और उनके साथियों ने काव्य प्रस्तुतियों से लोगों को जमकर गुदगुदाया। चक्रधर ने सामाजिक व्यवस्थाओं पर करारे तंज कसे।
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जागरूक होना जरूरी
साथ ही उन्होंने रचना जो मेहनत करी.. तेरा पेशा रहेगा, अभी कर ले पूरे... सभी काम अपने, तू क्या सोचता है... हमेशा रहेगा से युवाओं को चेताया कि समाज की बेहतरी के लिए उनका जागरूक होना जरूरी है। तू गर दंरिदा है.. तो शमशान तेरा है...अगर परिंदा है...तो आसमान तेरा है और एक के पास मूंछ थी... एक के पास पूंछ थी... मूंछ वाले को कोई पूछता नहीं था.. पूंछ वाले की पूछ नहीं थी आदि से लोगों का मनोरंजन किया।
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डा. विष्णु सक्सेना ने जमीन जल रही है... फिर भी चल रहा हूं मैं... फिजा का वक्त है और फूलफल रहा हूं मैं..., मधु मोहिनी ने प्यारा प्यारा जग लगे.. तो जानिए वो प्यार है.. कुछ अलग अलग लगे... तो जानिए वो प्यार है... के माध्यम से समाज में प्रेम का वातावरण बनाने का आह्वान किया।
21 वीं सदी में ढूंढते रह जाएगा, आंखों में पानी, दादी की कहानी, संतों की बानी और कर्ण जैसा दानी... की प्रस्तुति से अरूण जैमिनी ने विलुप्त हो रही संस्कृति को बचाने की पहल की। तेज नारायण शर्मा ने भ्रष्ट नेताओं और स्वार्थप्रेरित राजनीति को कटघरे में खड़ा किया।
व्यंग के बिना अच्छे दिन नहीं आते
व्यंग है तो समाज जीवित है, क्योंकि व्यंग ही है जो हमें बताता है कि अच्छे दिन आने वाले हैं। जहां व्यंग नहीं रहता वहां अच्छे दिन नहीं आते हैं। इस तरह सम्मेलनों का मकसद मनोरंजन के साथ हिंदी, उर्दू कविता की गंगा जमुनी तहजीब को बचाए रखना है। हम अपनी भाषाओं से प्रेम सीखेंगे।
पिछले पांच सालों में हास्य कविता के नाम पर लतीफों का चलन बढ़ गया है, जिसमें युवाओं तक यही संदेश जा रहा है कि यही मंचीय कविता है। द्विअर्थी लाफ्टर शो के सामने कवि सम्मेलन को मजबूत किए जाने की जरूरत है।
- पद्मश्री डा. अशोक चक्रधर, प्रसिद्ध हास्य कवि