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विपक्ष को धूल चटाकर रावत बने चैंपियन
अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 19 Feb 2014 11:07 AM IST
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उत्तराखंड विधानसभा में सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव मंगलवार को सदन में गिर गया। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्तापक्ष व विपक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर भी चला।
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भोजनावकाश के बाद स्पीकर ने प्रस्ताव पर वोटिंग कराई तो सरकार के पक्ष में 40 और खिलाफ 29 मत पड़े।
प्रस्ताव पर सदन में हंगामा
मंगलवार की सुबह सदन शुरू हुआ तो नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा कराने की मांग की। लेकिन संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा ह्दयेश ने कहा कि विपक्ष ने आज अविश्वास प्रस्ताव का कोई नोटिस नहीं दिया।
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इस पर विपक्ष भड़क उठा और भाजपा के मदन कौशिक ने कहा कि नोटिस तो सोमवार को ही दे दिया था, वह कैसे रिजेक्ट हो सकता है। पूरा विपक्ष वेल में आकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगा। कार्यवाही शुरू होने के पांच मिटन बाद ही सदन 12 बजे तक स्थगित कर दिया। इसके बाद चर्चा शुरू कराई गई।
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चर्चा के लिए तीन घंटे का समय
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल ने तीन घंटे का समय निर्धारित किया लेकिन बाद में समय बढ़ाना पड़ा।
विपक्ष के आरोपों के जवाब में नेता सदन हरीश रावत ने कहा कि आप मुख्यमंत्री बदलने की बात मत कीजिए, यदि इसी पर बहस होनी है तो फिर यह सिलसिला नित्यानंद स्वामी से शुरू होगा। उन्हें किन परिस्थितियों में हटाया गया था। फिर खंडूड़ी और निशंक क्यों हटे।
हरीश रावत ने व्यक्त किया खेद
उन्होंने कहा कि अपने मंत्री के अपमान को लेकर मैं खुद भी व्यथित हूं और इसके लिए खेद व्यक्त करता हूं। हरीश ने विपक्ष से प्रस्ताव वापस लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल एकजुट है। 18 दिन में पांच कैबिनेट बैठक हुई और 102 फैसले लिए गए हैं। एका का इससे बड़ा सबूत और क्या दूं।
अजय भट्ट ने जताया विरोध
नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने कहा कि सरकार के अंदरुनी झगड़े से देश भर में प्रदेश की बदनामी हो रही है। मंत्रिमंडल का गठन सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना के साथ होता है। यदि सबकुछ मुख्यमंत्री को ही करना है तो फिर कैबिनेट की जरूरत ही क्या है। और यदि जरूरत है तो मंत्री बेरोजगार क्यों घूम रहे है।
उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में कुछ नहीं हुआ। 28 अक्टूबर को शवों के खींचे गए फोटो भी भट्ट ने सदन में रखे। सिडकुल में सरकारी जमीने बिल्डरों को बेच दी गई। लॉ एंड ऑर्डर की व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त है।
भाजपा ने बताया संवैधानिक संकट
भाजपा के ही मदन कौशिक ने कहा कि सरकार को बने 18 दिन में हो गए और झगड़ा सड़क पर आ गया। प्रदेश में फिलहाल संवैधानिक संकट है। भाजपा के रमेश पोखरियाल निशंक ने मंत्री बगैर विभाग के घूम रहे हैं।
उनके पास 18 दिन से कोई काम नहीं है। सरकार बताए कि मंत्रियों को वेतन भत्ते मिल रहे है या नहीं। यदि मिल रहे हैं तो क्यों नहीं नो वर्क नो पे लागू होना चाहिए। बगैर काम के मंत्री वेतन कैसे ले सकते है।
स्पीकर ने अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग कराई। वोटिंग के दौरान सरकार केपक्ष में 40 व विपक्ष में 29 मत पड़े। विपक्ष के एक विधायक राजकुमार ठुकराल सदन में मौजूद नहीं थे।