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स्टिंग मामले में हरीश रावत को लगा झटका, हाईकोर्ट ने सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी

Tue, 01 Oct 2019 08:23 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 01 Oct 2019 08:23 AM IST
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Harish rawat sting case hearing in High court today
हरीश रावत - फोटो : फाइल फोटो

हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग मामले में सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने की छूट दे दी है साथ ही यह भी साफ किया कि यह कार्रवाई न्यायालय के अंतिम आदेश पर आधारित होगी। मामले में अगली सुनवाई एक नवंबर को होगी। 

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वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ ने सोमवार को सीबीआई की प्राथमिक जांच के बाद बनाई रिपोर्ट को पढ़ा और कहा कि उसके (हाईकोर्ट) समक्ष मुख्य विचारणीय विषय 31 मार्च 2016 को राज्यपाल की ओर से दिए गए सीबीआई जांच के आदेश, 2 फरवरी के अध्यादेश और 15 मई 2016 के राज्य सरकार की ओर से सीबीआई के बजाय एसआईटी से मामले की जांच के आदेश की वैधता की जांच करना है। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई इस मामले में एफआईआर दर्ज करने को स्वतंत्र है और जांच शुरू कर सकती है, लेकिन आगे की कार्रवाई न्यायालय के अंतिम आदेश पर आधारित होगी।
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पूर्व सीएम रावत के अधिवक्ता पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने  एसआर बोम्मई केस का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्यपाल द्वारा लिए गए निर्णय असंवैधानिक हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बहाल हुई रावत सरकार कीकैबिनेट ने स्टिंग मामले की जांच एसआईटी से कराने  का निर्णय लिया था।
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सीबीआई के वकील असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल राकेश थपलियाल ने इसका प्रतिवाद करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति (हरीश रावत) पर आरोप हैं, उसे ही अपने खिलाफ जांच एजेंसी तय करने का अधिकार नहीं हो सकता। सिब्बल ने इस मामले में गहरी साजिश का आरोप लगाते हुए कहा कि रविवार के दिन सीडी की प्रमाणिकता को लेकर चंडीगढ़ लैब से रिपोर्ट आना ही इसका सबूत है। सिब्बल ने कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत और स्टिंग करने वाले उमेश शर्मा के बीच हुई बातचीत का विवरण भी कोर्ट के सामने प्रस्तुत किया। 

पिछली सुनवाई में सीबीआई की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया था कि वह स्टिंग मामले की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करना चाहती है और इस मामले में हरीश रावत के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने जा रही है। दूसरी तरफ हरीश रावत ने  इस मामले में सीबीआई के जांच करने के अधिकार को चुनौती देते हुए कहा था कि राज्य सरकार ने राष्ट्रपति शासन के दौरान किया गया सीबीआई जांच का नोटिफिकेशन वापस ले लिया और मामले की  जांच एसआईटी से कराने का निर्णय लिया था। ऐसे में सीबीआई को जांच का अधिकार रह ही नहीं जाता। हरीश रावत के अधिवक्ता ने सीबीआई की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को अवैध बताया था। 

राज्यपाल का फैसला गलत हुआ तो सीबीआई नहीं कर सकती प्रोसीक्यूशन-सिब्बल

पूर्व कानून मंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल का कहना है कि वह पहली नवंबर को होने वाली बहस के लिए भी पूरी तरह से तैयार हैं। मजबूती के साथ अपने तर्कों को रखेंगे। कहा कि वह पहली नबंवर को फिर हाईकोर्ट में बहस के लिए पहुंचेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग मामले में हाईकोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई के बाद सिब्बल पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। 

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कोर्ट ने कहा है कि सीबीआई ने अपनी प्रिलिमिनरी इंक्वायरी खत्म कर दी है और वह चाहती है कि हरीश रावत के खिलाफ एफआईआर दर्ज करे। कोर्ट ने कहा है कि हम सीबीआई के बीच में नहीं आ सकते। वह चाहती है तो एफआईआर दर्ज कर ले, लेकिन जो फैसला एफआईआर दर्ज करने का है वह इस पर आधारित होगा कि अगर 31 मार्च 2016 को गवर्नर का जो आर्डर था, अगर वह गलत निकला तो सीबीआई कोई प्रोसीक्यूशन नहीं कर सकती है।

उन्होंने कहा कि 15 मई 2016 को तत्कालीन कैबिनेट द्वारा सीबीआई जांच के आदेश को पलटकर एसआईटी जांच के आदेश का फैसला यदि सही था तब भी सीबीआई की जांच रद्द हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस पर पहली नवंबर को बहस होगी और वह फिर से आकर बहस करेंगे।

ये था मामला

मालूम हो कि 2016 में पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और हरक सिंह रावत के नेतृत्व में नौ कांग्रेस विधायकों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ बगावत कर दी थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने हरीश रावत सरकार को बर्खास्त कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। हरीश रावत हाईकोर्ट गए थे जहां से उनकी सरकार बहाल हुई थी। इस दौरान उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के एक निजी चैनल के मालिक ने हरीश रावत का स्टिंग किया था जिसमें हरीश रावत विधायकों की खरीद-फरोख़्त की बात करते दिखाई दिए थे।

इसी स्टिंग के आधार पर तत्कालीन राज्यपाल ने  सीबीआई जांच की सिफ़ारिश की थी। सरकार बहाल होने के बाद हरीश रावत ने इस केस की जांच सीबीआई के बजाय एसआईटी से करवाने की सिफारिश की थी, लेकिन यह मामला सीबीआई के पास ही रहा। इसके बाद हरीश रावत गिरफ़्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट की शरण में चले गए थे और हाईकोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया था कि कोई भी कार्रवाई करने से पहले वह कोर्ट से अनुमति ले। तीन सितंबर को सीबीआई ने हाईकोर्ट को यह जानकारी दी थी कि उसने इस केस की जांच पूरी कर ली है और वह जल्द ही इस मामले में एफ़आईआर दर्ज करना चाहती है।

रावत को याद आए कवि गोपाल दास नीरज

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत सोमवार को दिन भर अपने राजपुर रोड स्थित आवास में समर्थकों से घिरे रहे और हाईकोर्ट के मामले की जानकारी लेते रहे। बाद में रावत ने फेसबुक पेज पर लिखा कि उन्हें गोपाल दास नीरज की एक कविता याद आई और उन्हें इष्ट देव का सहारा मिला।

पिछली सुनवाई में हरीश रावत खुद नैनीताल पहुंचे थे। सोमवार को भी उनकी निगाह हाईकोर्ट में जारी सुनवाई पर लगी रही। दिन भर के घटनाक्रम को देखते हुए बाद में हरीश रावत ने फेसबुक पर लिखा कि हाईकोर्ट में जारी तर्कवितर्क को देखते हुए उन्हें महाकवि गोपाल दास नीरज याद आए।

नीरज ने लिखा कि सौ-सौ बार चिताओं ने मरघट में मेरी सेज बिछाई है। रावत के मुताबिक उन्हें अपने इष्ट देव पर भरोसा है। हाईकोर्ट में जारी सुनवाई को देखते हुए दिनभर रावत के राजपुर रोड स्थित आवास पर समर्थकों का तांता लगा रहा। कई समर्थकों ने रावत से फोन पर भी बात की। 

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