ये क्या! हरीश रावत बता रहे महाराज को बीमार
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मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सतपाल महाराज के खिलाफ कुछ तीखा कहने से परहेज किया। हालांकि महाराज के सामरिक विषयों पर दिए गए बयान पर उन्होंने कहा कि हम देश की सुरक्षा को लेकर उतने ही गंभीर और चिंतित हैं जितने हमारे दोस्त हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा में जाने के बाद मेरे दोस्त को भी छूत की बीमारी लग गई है। उन्हें देश की विदेश और रक्षा नीति को चुनाव से नहीं जोड़ना चाहिए। देश की सीमाएं पहले से ज्यादा सुरक्षित हैं।
वहीं, सतपाल महाराज के भाई भोला महाराज से नजदीकियों और उन्हें कांग्रेस में शामिल कराने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनके साथ किसी भी स्तर पर कभी संपर्क नहीं हुआ है।
रामदेव पर कोई शिथिलता नहीं: सीएम
मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि बाबा रामदेव के मामलों को लेकर उनकी सरकार ने कोई शिथिलता नहीं बरती है।
दरअसल मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के कार्यकाल में बाबा रामदेव पर एक साथ कई मामले दर्ज हुए थे।
हरीश रावत से पूछा गया था कि उनके आने के बाद बाबा पर लचीला रुख अपनाया गया है। जिस पर हरीश रावत ने कहा कि बाबा पर सरकार के रुख में कोई परिवर्तन नहीं आया है।
'पीठ में छुरा घोंपकर सांसद बने थे सतपाल'
सतपाल महाराज के भाजपा के स्वागत समारोह में बुधवार को उत्तराखंड गठन में अहम भूमिका निभाने को उत्तराखंड क्रांति दल ने सिरे से खारिज कर दिया।
उक्रांद के पंवार धड़े के अध्यक्ष त्रिवेंद्र सिंह पंवार ने कहा कि सतपाल महाराज ने संघर्ष समिति की पीठ में छुरा घोंप कर सांसद का चुनाव लड़ा। पंवार उस समय पार्टी के अध्यक्ष होने के साथ गढ़वाल मंडल के संयोजक थे। पंवार ने कहा कि इंद्रमणी बडोनी ने महाराज को राज्य क्रांति संघर्ष समिति का संयोजक बनाया था।
समिति ने उस समय 1996 में लोकसभा चुनाव से बाहर रहने का फैसला किया लेकिन सतपाल महाराज ने समिति छोड़ कर कांग्रेस से चुनाव लड़ा। महाराज ने आंदोलनकारियों को धोखा दिया और अब खुद राज्य गठन का श्रेय ले रहे हैं।