पढ़िए, हिमालय दिवस के लिए सीएम रावत का खास प्लान
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मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हिमालय दिवस के उपलक्ष्य में प्रदेश में कोई भी नीति हिमालय के पर्यावरण को ध्यान में रखकर बनाने का ऐलान किया है। इसके साथ ही हिमालय दिवस पर पूरे प्रदेश में छात्रों को हिमालय बचाओं की शपथ दिलाने और जागरूकता रैली निकालने की योजना भी बनाई गई है।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में प्रदेश सरकार ने नौ सितंबर को हिमालय दिवस पूरे प्रदेश में सरकार के स्तर से मनाने का ऐलान किया था।
हिमालय दिवस की पूर्व संध्या पर जारी संदेश में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि हिमालय को बचाना सबसे बड़ी चुनौती है और इस चुनौती का सामना सबको मिलकर करना होगा। मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रदेश सरकार अब कोई भी नीति हिमालय के पर्यावरण को ध्यान में रखकर बनाएगी। हमें अपने विचार के केंद्र में हिमालय को रखना होगा।
हिमालय दिवस पर नौ सितंबर को मुख्यमंत्री सुबह राजपुर रोड स्थित गांधी पार्क में छात्र-छात्राओं को हिमालय बचाओ की शपथ दिलाएंगे। यहां से जागरूकता रैली भी निकाली जाएगी जिसको मुख्यमंत्री हरीश रावत हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। मुख्यमंत्री के मुताबिक इस तरह का आयोजन पूरे प्रदेश में तहसील, ब्लॉक और जिला मुख्यालयों और स्कूलों में किया जाएगा।
केंद्र को हिमालय नीति का प्रस्ताव भेजे उत्तराखंड: किशोर
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल और विधानसभा के अन्य सदस्यों से हिमालय के लिए अलग से नीति बनाने की मांग का प्रस्ताव केंद्र को भेजने का आग्रह किया है। किशोर के मुताबिक हिमालय दिवस पर कांग्रेस विचार गोष्ठी का आयोजन करेगी।
किशोर का कहना है कि केदारनाथ की आपदा से यह जाहिर हो गया है कि हिमालय के ऊपर पर्यावरण असंतुलन का खतरा मंडरा रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण पूरा विश्व ही संकट में है।
उत्तराखंड ने चिपको आंदोलन के जरिए विश्व को पर्यावरण के प्रति गंभीर रहने का संदेश दिया था। वे खुद भी लंबे समय तक हिमालय आंदोलन से जुड़े रहे। हिमालय की रक्षा में सरकार, पर्यावरणविद, स्वयंसेवी संस्थाओं और जनपक्ष की मजबूत भागीदारी होनी चाहिए।
हिमालय दिवस पर सेब महोत्सव
विचार गोष्ठी होगी और उत्पादकों को नई वैज्ञानिक जानकारी दी जाएगी। महोत्सव में मुख्यमंत्री के अलावा कृषि मंत्री हरक सिंह भी शामिल हो रहे हैं।
नेगी के मुताबिक सेब का उत्पादन देश में वर्ष 1855 में सबसे पहले नैनीताल और अल्मोड़ा में अंग्रेजों ने शुरू किया था। इस समय प्रदेश में करीब 32 हजार हेक्टेयर में सेब की खेती हो रही है और करीब एक लाख 23 हजार मीट्रिक टन उत्पादन हो रहा है।